Space News: स्पेस एक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का एक अनियंत्रित हिस्सा चंद्रमा से टकरा गया है। हालांकि वैज्ञानिकों को इसकी आधिकारिक पुष्टि करने में कुछ समय लगेगा। यह हिस्सा काफी समय से अंतरिक्ष में भटक रहा था। इस घटना से पृथ्वी को किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार रॉकेट का ऊपरी हिस्सा करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चांद के पश्चिमी किनारे पर टकराया। यह टक्कर आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई, जिसे पृथ्वी से देखना बहुत कठिन होता है। इस दौरान चांद का चक्कर काट रहा कोई सैटेलाइट सीधे फोटो नहीं ले सका।
नासा और दक्षिण कोरियाई ऑर्बिटर करेंगे नई तस्वीरों की जांच
इस घटना की पुष्टि के लिए नासा का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर और दक्षिण कोरिया का पाथफाइंडर लूनर ऑर्बिटर जांच करेंगे। यह ऑर्बिटर प्रभावित क्षेत्र के ऊपर से गुजरते समय तस्वीरें खींचेंगे। इन फोटो के विश्लेषण के बाद ही वैज्ञानिक सतह पर बने नए गड्ढे की पुष्टि आधिकारिक रूप से कर पाएंगे।

स्पेस एक्स के प्रमुख एलन मस्क ने एक एआई जनरेटेड वीडियो शेयर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रॉकेट का हिस्सा ठीक इसी तरह चंद्रमा की सतह से टकराया होगा। वास्तविक तस्वीरें नहीं मिलने के कारण वैज्ञानिकों ने फिलहाल केवल अनुमान और गणना के आधार पर बयान जारी किए हैं।
स्कूल बस के आकार के मलबे से पृथ्वी पूरी तरह सुरक्षित
नासा के प्रवक्ता जिमी रसेल ने स्पष्ट किया कि इस टक्कर से हमारी पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। रॉकेट का यह हिस्सा एक स्कूल बस के आकार जितना बड़ा था। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तीव्र टक्कर के कारण चंद्रमा की सतह पर एक नया क्रेटर बन गया होगा।

फाल्कन-9 रॉकेट जनवरी 2025 में दो लूनर लैंडर लेकर अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ था। इसका निचला हिस्सा धरती पर सुरक्षित लौट आया, लेकिन ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही छूट गया। लगभग 19 महीने तक बिना नियंत्रण घूमने के बाद गुरुत्वाकर्षण और सूर्य के प्रभाव से यह चांद की तरफ मुड़ गया।
अंतरिक्ष मलबे और चंद्रमा पर पहले भी हुई हैं ऐसी दुर्घटनाएं
चंद्रमा से रॉकेट या मलबे का टकराना कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1959 में सोवियत संघ का लूना-2 चांद से टकराने वाला पहला मानव निर्मित यान बना था। इसके अलावा नासा के अपोलो मिशन और 2009 के सेंटौर मिशन के दौरान भी कई रॉकेट पार्ट्स अध्ययन के लिए चांद पर गिराए गए थे।
हाल के वर्षों में भारत का चंद्रयान-2 लैंडर, इजराइल का बेरेशीट लैंडर, चीनी रॉकेट का टुकड़ा और रूस का लूना-25 भी दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई के अंत तक पृथ्वी की कक्षा में 17,000 टन से अधिक वजन का 46,000 अंतरिक्ष मलबा घूम रहा था।