New Delhi News: भारत के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट को सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद अब देश में इसके व्यावसायिक स्तर पर लॉन्च होने की संभावनाएं काफी तेज हो गई हैं। आवश्यक मंजूरियां मिलते ही यह सेवा शुरू होगी।
पारंपरिक इंटरनेट के लिए फाइबर केबल या मोबाइल टावरों की जरूरत होती है, लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट सीधे पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों से कनेक्ट होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पहाड़ों, द्वीपों और सीमावर्ती इलाकों में भी आसानी से निर्बाध कनेक्टिविटी दी जा सकती है।
स्टारलिंक, जियो और वनवेब जैसी दिग्गज कंपनियां रेस में
भारत में इस सेक्टर में कई दिग्गज वैश्विक और घरेलू कंपनियां अपनी सेवाएं देने की तैयारी में हैं। रिलायंस जियो, एयरटेल समर्थित वनवेब और एलन मस्क की स्टारलिंक को आवश्यक सरकारी मंजूरियां मिल चुकी हैं। वहीं ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन भी अपने ‘प्रोजेक्ट कुइपर’ के जरिए 2027-28 तक भारतीय बाजार में उतरने की योजना बना रहा है।
परियोजना में देरी का मुख्य कारण स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर टेलीकॉम कंपनियों के बीच मतभेद था। रिलायंस जियो चाहती थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी हो, जबकि स्टारलिंक प्रशासनिक आवंटन की मांग कर रही थी। अंततः केंद्र सरकार ने स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक आधार पर आवंटित करने का फैसला किया, जिससे सेवाएं शुरू करने का रास्ता साफ हो गया।
सस्ते और प्रीमियम दोनों तरह के प्लान होंगे उपलब्ध
आम उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए जियो ₹500 से ₹1,000 प्रति माह के बजट-फ्रेंडली प्लान ला सकती है। हर घर में डिश लगाने के बजाय कंपनी साझा गेटवे और अपने एयरफाइबर नेटवर्क के जरिए पूरे गांव तक इंटरनेट पहुंचाने की योजना बना रही है। इससे आम यूजर्स के लिए यह सर्विस काफी सस्ती और आसान हो जाएगी।
वहीं एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक शुरुआती चरण में प्रीमियम ग्राहकों को टारगेट करेगी। इसके लिए यूजर्स को ₹30,000 से ₹34,000 तक का रिसीवर हार्डवेयर खरीदना पड़ेगा, जबकि मासिक अनलिमिटेड प्लान ₹3,000 से ₹4,200 के बीच रहेगा। वनवेब का मुख्य फोकस कॉर्पोरेट, रक्षा क्षेत्र और एविएशन सेक्टर पर रहेगा।