New Delhi News: अगर आप शोधकर्ता हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। दिग्गज एआई कंपनी ओपनएआई ने दुनिया भर के एक लाख शैक्षणिक शोधकर्ताओं को अपने एडवांस्ड एआई मॉडल्स का फ्री एक्सेस देने की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक रिसर्च को तेज करना है।
चैटजीपीटी फॉर एकेडेमिक रिसर्चर्स प्रोग्राम के तहत मिलेगा फायदा
कंपनी ने यह खास पहल चैटजीपीटी फॉर एकेडेमिक रिसर्चर्स प्रोग्राम के तहत शुरू की है। ओपनएआई के अनुसार इस योजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से योग्य शोधकर्ताओं को ऐसे प्रीमियम फीचर्स मिलेंगे, जो आम यूजर्स के लिए सीमित हैं या फिर सिर्फ पेड सब्सक्रिप्शन प्लान के साथ ही उपलब्ध कराए जाते हैं।
जानिए किन शोधकर्ताओं को दिया जाएगा इस योजना का लाभ
ओपनएआई का यह नया ऑफर सभी सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं होगा। इसका फायदा केवल मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से जुड़े शोधकर्ताओं को ही मिलेगा। कंपनी शुरुआती चरण में दुनिया भर के लगभग एक लाख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को इस महत्वाकांक्षी प्रोग्राम का हिस्सा बनाने की योजना बना रही है।
एडवांस्ड फीचर्स और बड़ी यूसेज लिमिट का मिलेगा फायदा
चयनित शोधकर्ताओं को ओपनएआई के सबसे आधुनिक और शक्तिशाली एआई मॉडल्स का एक्सेस मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें चैटजीपीटी, चैटजीपीटी वर्क और कोडैक्स जैसे टूल्स के उपयोग का अवसर मिलेगा। बड़े डेटा सेट और लंबे रिसर्च पेपर्स पर काम करने के लिए सामान्य यूजर्स से ज्यादा यूसेज लिमिट और बड़ा कॉन्टेक्स्ट विंडो दिया जाएगा।
वैज्ञानिक खोजों को रफ्तार देने के लिए बड़ा निवेश
ओपनएआई का मानना है कि ये आधुनिक एआई टूल्स डेटा एनालिसिस, रिसर्च पेपर की समरी और कोड राइटिंग जैसे जटिल कामों को आसान बनाएंगे। एआई कंपनी ने वैज्ञानिक रिसर्च को सपोर्ट करने के लिए साल 2027 तक 250 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने का निर्णय लिया है, जिससे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई खोजों को बल मिलेगा।
भारतीय संस्थानों और शोधकर्ताओं के लिए क्या होंगे मायने
अगर भारत के किसी पात्र विश्वविद्यालय या संस्थान को इसमें शामिल किया जाता है, तो भारतीय शोधकर्ताओं को बिना कोई महंगा सब्सक्रिप्शन खरीदे एडवांस्ड एआई टूल्स का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस प्रोग्राम में शामिल होने वाले सभी संस्थानों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की है।