कटेहरी में रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से 100 से अधिक गांवों की बढ़ी परेशानी, तीन दशक बाद भी समपार की मांग अधूरी

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Ambedkar Nagar News: लखनऊ-वाराणसी रेलखंड के दोहरीकरण के बाद रास्ते बंद होने से कटेहरी क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निनामपुर, अरियौना, कुर्मीडीहा और रामदासपट्टी में रेलवे क्रॉसिंग की मांग दशकों से लंबित है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

अंबेडकर नगर जिले के कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में लखनऊ-वाराणसी रेलखंड के दोहरीकरण के बाद से ग्रामीण गंभीर आवागमन संकट से जूझ रहे हैं। रेलवे ट्रैक पर दूसरी लाइन बिछने के बाद विभाग ने करीब सात वर्ष पहले यहां से पारंपरिक आवागमन पूरी तरह रोक दिया। इसके चलते निनामपुर, अरियौना, कुर्मीडीहा और रामदासपट्टी समेत आसपास के 100 से अधिक गांवों के लोगों को ब्लॉक मुख्यालय, रेलवे स्टेशन, जिला मुख्यालय और राजधानी तक जाने के लिए कम दूरी के बजाय कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

कटेहरी विधानसभा के उत्तरी इलाके के गांवों को मुख्य केंद्रों से जोड़ने वाला यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में रेलवे समपार (क्रॉसिंग) की मांग करीब सात दशकों से उठती रही है, लेकिन तीन दशक से तेज हुए प्रयासों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इस दौरान केंद्र में भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों की सरकारें आईं और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी बदले। लोकसभा और विधानसभा में यह मुद्दा कई बार उठाया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

1997 में शुरू हुआ था आंदोलन, दर्ज हुए थे मुकदमे

स्थानीय स्तर पर इस समस्या को लेकर वर्ष 1997 में कटेहरी बाजार निवासी बजरंगबली चौबे के नेतृत्व में व्यापक आंदोलन शुरू हुआ था। उस समय तत्कालीन डीआरएम पीटी टंडन, सांसद, विधायक, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की गई थी। इसके बाद जब तत्कालीन डीआरएम एहतराम अली स्थलीय निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका घेराव कर जोरदार नारेबाजी की थी। इस विरोध प्रदर्शन के बाद रेलवे विभाग ने बजरंगबली चौबे सहित करीब एक दर्जन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया था।

रेलमंत्री से लगाई गई गुहार, स्टेशन अधीक्षक ने भेजा प्रस्ताव

कटेहरी रेलवे स्टेशन के अधीक्षक वीरेंद्र सागर के अनुसार, ग्रामीणों का मांग पत्र संज्ञान में लेते हुए उच्चाधिकारियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। वहीं, स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हाल ही में रेलमंत्री से मुलाकात कर समस्या के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। रेलमंत्री की ओर से इस मामले के त्वरित निस्तारण का आश्वासन मिला है और समाधान की दिशा में विभागीय स्तर पर प्रयास जारी हैं।

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