New Delhi News: साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक अनोखा मामला सामने आया है। भारतीय मूल के तीन शोधकर्ताओं ने एंथ्रोपिक के क्लॉड चैटबॉट की मदद से ओपनएआई के सिस्टम में मौजूद तकनीकी कमी का पता लगाया। यह कोई साइबर हमला नहीं था, बल्कि कंपनी के अधिकृत बग-बाउंटी प्रोग्राम के तहत की गई वैध सुरक्षा जांच थी।
हैकट्रॉन एआई स्टार्टअप से जुड़े हर्ष जायसवाल, मोहन पेधापति और राहुल मैनी ने इस पूरे प्रयोग को अंजाम दिया। तीनों विशेषज्ञों ने ओपनएआई के पब्लिक कम्युनिटी फोरम में इमेज फाइल हैंडलिंग से जुड़ी कमी खोजी। इसके बाद टीम ने क्लॉड की सहायता से कोड तैयार करके कर्मचारियों के अकाउंट और प्राइवेट गिटहब एनवायरनमेंट तक पहुंच बना ली।
बहत्तर घंटे के अंदर पूरी की गई सफल टेस्टिंग
शोधकर्ताओं को सिस्टम की पहली खामी से लेकर प्राइवेट डेटा तक पहुंचने में 72 घंटे से भी कम समय लगा। क्लॉड एआई ने कोड को तेजी से लिखने, डीबग करने और एडजस्ट करने में एक सहायक की भूमिका निभाई। हालांकि, अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने और सिस्टम में सेंध लगाने की मुख्य रणनीति पूरी तरह भारतीय रिसर्चर्स की ही थी।
इस पूरी प्रक्रिया में टीम ने एआई टोकन्स पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च किए। ओपनएआई ने सूचना मिलते ही इन सुरक्षा खामियों को तुरंत ठीक कर दिया और टीम को बग बाउंटी के रूप में लगभग 5.5 लाख रुपये का इनाम दिया। प्रोजेक्ट का नेतृत्व 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले हर्ष जायसवाल ने किया था।