Mumbai News: महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार ने गोविंदाओं के हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने इस साल त्योहार में भाग लेने वाले लगभग 1.60 लाख गोविंदाओं के लिए व्यापक बीमा योजना शुरू करने की घोषणा की है। सरकार इस पूरी योजना का खर्च खुद उठाएगी।
राज्य सरकार ने पिछले साल 2025 में 1,50,000 खिलाड़ियों का बीमा करने का प्रावधान किया था, जिसमें इस बार बढ़ोतरी की गई है। हालांकि बीमा कंपनी का चयन होना अभी बाकी है। इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल होने वाले गोविंदाओं का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त किया जाएगा।
बीमा योजना के तहत गोविंदाओं को मिलेगी इतनी वित्तीय सहायता
योजना के मुताबिक उत्सव के दौरान किसी गोविंदा की मौत होने, दो हाथ-पैर या दोनों आंखें खोने पर 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं एक हाथ-पैर या एक आंख खोने की स्थिति में 5 लाख रुपये का बीमा दिया जाएगा। अस्पताल में भर्ती होने पर स्थिति के अनुसार 1 से 10 लाख रुपये मिलेंगे।
हादसे के कारण स्थायी रूप से पूरी तरह विकलांग होने वाले खिलाड़ी भी 10 लाख रुपये पाने के हकदार होंगे। इसके अलावा स्थायी रूप से आंशिक विकलांगता के मामलों में बीमा पॉलिसी के निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के हिसाब से मुआवजा तय किया जाएगा। इस फैसले से प्रतिभागियों को काफी सुरक्षा मिलेगी।
खतरनाक मानव पिरामिड और उत्सव की धार्मिक मान्यता
यह फैसला महाराष्ट्र के सबसे बड़े त्योहारों में से एक से पहले राहत लेकर आया है। हर साल हजारों गोविंदा ऊंचाई पर लटकी मिट्टी की मटकी तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं। इस परंपरा में भारी भीड़ और इनाम तो होता है, लेकिन ऊंचाई से गिरने पर गंभीर चोट लगने का जोखिम भी बना रहता है।
दही हांडी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्म दिवस यानी जन्माष्टमी के मौके पर मनाया जाता है। यह उत्सव बाल कृष्ण की मक्खन चुराने वाली लीलाओं को दर्शाता है। इसमें गोविंदाओं की अलग-अलग टीमें कई स्तरों के इंसानी पिरामिड बनाकर हवा में लटकी दही और मक्खन से भरी मटकी फोड़ने की कोशिश करती हैं।