Bengaluru News: कर्नाटक सरकार ने गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाला पर लगाया गया एक साल का प्रतिबंध वापस लेने का फैसला किया है। प्रतिबंध लागू होने के केवल दो दिन बाद ही यह कदम उठाया गया। विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि इस रोक से सुपारी उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के साथ अहम बैठक के बाद अधिकारियों को प्रतिबंध आदेश तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए। इस सर्वदलीय बैठक का नेतृत्व भाजपा विधायक अरगा ज्ञानेंद्र और कांग्रेस विधायक डी.जी. शांतन गौड़ा ने किया, जिन्होंने सुपारी बाजार के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई थी।
बिना जानकारी जारी नोटिफिकेशन पर सीएम की नाराजगी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह मुद्दा कैबिनेट बैठक में भी उठा। मुख्यमंत्री शिवकुमार इस बात पर नाराज थे कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त का यह आदेश उनकी जानकारी के बिना ही जारी कर दिया गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा कि सार्वजनिक नोटिफिकेशन जारी करने से पहले उन्हें विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।
किसानों के हितों और राजनीतिक दबाव का असर
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि स्वास्थ्य जरूरी है, लेकिन पांच साल तक फसल का इंतजार करने वाले सुपारी किसानों के हितों की रक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं जेडीएस विधायक ए. मंजू और भाजपा सांसद बी.वाई. राघवेंद्र ने विरोध जताते हुए दावा किया कि आदेश जारी होते ही सुपारी के दाम तेजी से गिर गए थे।
