Bengaluru News: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की हालिया रिलीज फिल्म ‘जन नायकन’ को कर्नाटक में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दशकों पुराने कावेरी नदी जल विवाद के कारण कन्नड़ संगठनों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस फिल्म की स्क्रीनिंग रुकवा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेकेदातू बांध परियोजना पर विजय के रुख से नाराज प्रदर्शनकारियों ने थियेटरों के बाहर लगे पोस्टर्स फाड़ दिए। इसके बाद सुरक्षा और डर के माहौल को देखते हुए थियेटर मालिकों ने स्वेच्छा से फिल्म के शो रद्द कर दिए। 23 जुलाई को रिलीज हुई यह फिल्म कर्नाटक के 150 से ज्यादा सिनेमाघरों में लगी थी।
बेंगलुरु और मंड्या में पुलिस अलर्ट, थियेटरों के बाहर सुरक्षा बढ़ी
बेंगलुरु के प्रसिद्ध उर्वशी थियेटर में हिंसा की आशंका के चलते पुलिस ने एडवायजरी जारी की थी। इसके बाद प्रबंधन ने ‘जन नायकन’ हटाकर कन्नड़ फिल्म ‘कारावली’ की स्क्रीनिंग शुरू कर दी। एहतियात के तौर पर थियेटर के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। मंड्या जिले में भी विजय के पोस्टर्स फाड़कर शो बंद कराए गए।
कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच तनाव चरम पर है। मॉनसून में कमी के चलते कर्नाटक द्वारा तय मात्रा से कम पानी छोड़े जाने से तमिलनाडु में संकट गहरा गया है। इसके साथ ही मेकेदातू बांध परियोजना का तमिलनाडु कड़ा विरोध कर रहा है, क्योंकि इससे उसके हिस्से का पानी प्रभावित होने की आशंका है।
कर्नाटक सीएम से मुलाकात की तैयारी, विपक्ष ने उठाया सवाल
तमिलनाडु मुख्यमंत्री कार्यालय ने संकेत दिए हैं कि थलपति विजय जल्द ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। हालांकि, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने इस प्रस्तावित दौरे को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन का कहना है कि जब कर्नाटक ट्रिब्यूनल के आदेश नहीं मान रहा, तो बातचीत बेमतलब है।
कावेरी नदी का यह विवाद बेहद संवेदनशील और पुराना राजनीतिक मुद्दा रहा है। पिछली सरकारें भी कांग्रेस के साथ गठबंधन में होने के बावजूद इस जटिल समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाल पाई थीं। अब सत्ता संभालने के बाद थलपति विजय के लिए यह विवाद एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन चुका है, जिसका असर उनकी फिल्म पर भी दिख रहा है।