स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को मिलेगी सम्मान पेंशन, हाईकोर्ट ने खारिज की केंद्र सरकार की अपील

Share

- Advertisement -

Chandigarh News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को मिलने वाली पेंशन पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य होने पर आश्रितों का पेंशन दावा महज तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने भिवानी निवासी स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बेटी को स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना का लाभ देने के एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर केंद्र सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का उद्देश्य उनके बलिदान का सम्मान करना और आश्रितों को सहारा देना है। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस राजेश गौड़ की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को भिवानी निवासी कमलेश को ‘स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना, 1980’ के तहत नियमानुसार लाभ जारी करने का निर्देश दिया।

मामले के अनुसार, कमलेश के पिता दाताराम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के सदस्य के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए थे। हरियाणा सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देते हुए 11 अगस्त 1981 को वित्तीय सहायता मंजूर की थी। दाताराम के निधन के बाद यह सहायता उनकी पत्नी छन्नो देवी को मिलती रही।

केंद्र सरकार ने तकनीकी आधार पर खारिज किया था दावा

मां के निधन के बाद दाताराम की विधवा बेटी कमलेश ने केंद्र सरकार की योजना के तहत आश्रित पेंशन के लिए आवेदन किया, जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया। केंद्र सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि दाताराम ने अपने जीवनकाल में इस केंद्रीय योजना के तहत आवेदन नहीं किया था और न ही उन्हें केंद्र से पेंशन मंजूर हुई थी। इसके अलावा 6 अगस्त 2014 के संशोधित दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा कि बेटी को आश्रित पेंशन पाने का अधिकार नहीं है।

राज्य की मान्यता महत्वपूर्ण साक्ष्य, आठ सप्ताह में लाभ देने के आदेश

खंडपीठ ने केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार की मान्यता और उपलब्ध दस्तावेज इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि दाताराम स्वतंत्रता सेनानी थे। केवल इसलिए कि उन्होंने जीवनकाल में केंद्रीय पेंशन नहीं ली, उनके बलिदान और परिवार के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि एकल पीठ के 2 मई 2019 के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हाईकोर्ट ने केंद्र की अपील को निरस्त करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा और प्रशासन को आठ सप्ताह के भीतर कमलेश को सभी पेंशन लाभ जारी करने का आदेश दिया।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News