New Delhi News: आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद करदाताओं को रिफंड का इंतजार रहता है। आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के कुछ हफ्तों में पैसा बैंक खाते में आ जाता है। हालांकि, फॉर्म भरते समय की गई कुछ छोटी गलतियों के कारण कई बार रिफंड की रकम अटक जाती है।
रिफंड अटकने का पहला प्रमुख कारण गलत बैंक डिटेल दर्ज करना या खाते का वैलिडेट न होना है। यदि खाता प्री-वैलिडेटेड नहीं है या पैन कार्ड से लिंक नहीं है, तो रिफंड फेल हो जाएगा। इसके अलावा रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है।
तीसरा बड़ा कारण आय का डेटा मिसमैच होना है। जब क्लेम की गई राशि फॉर्म 26AS, एआईएस या टीआईएस के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो आयकर विभाग प्रक्रिया रोक देता है। इसके अलावा किसी पिछले साल की बकाया टैक्स देनदारी होने पर विभाग नए रिफंड से उसकी भरपाई कर लेता है।
पांचवीं वजह आईटीआर का गहन जांच यानी स्क्रूटनी के लिए चुना जाना है। ऐसे में विभाग दावों की जांच के लिए अतिरिक्त समय लेता है। यदि आपका रिफंड अटका है, तो आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर आसानी से अपना रिफंड स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
पोर्टल पर लॉगिन करके ‘View Filed Returns’ सेक्शन में ताजा स्थिति देखी जा सकती है। अगर बैंक डिटेल गलत होने से रिफंड फेल हुआ है, तो सही बैंक खाता चुनकर पोर्टल पर तुरंत ‘Refund Reissue Request’ दर्ज की जा सकती है। इससे अटका हुआ रिफंड खाते में आ जाएगा।