दिल्ली यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला, चार वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद अब सीधे पीएचडी में मिलेगा दाखिला

Share

- Advertisement -

Delhi News: दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) ने पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट कोर्स (FYUP) के बाद सीधे पीएचडी में दाखिले की मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू इस नए नियम से प्रतिभाशाली युवाओं को कम उम्र में रिसर्च से जुड़ने का मौका मिलेगा।

मास्टर डिग्री की अनिवार्यता खत्म, बचेगा छात्रों का समय

पारंपरिक नियमों के तहत पीएचडी के लिए 3 साल की ग्रेजुएशन और 2 साल की मास्टर डिग्री होना अनिवार्य था। हालांकि, नए संशोधनों के बाद 8-सेमेस्टर यानी 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा करने वाले अभ्यर्थी बिना मास्टर्स किए सीधे रिसर्च में प्रवेश ले सकेंगे। इस कदम से विद्यार्थियों का एक से दो साल का समय बचेगा।

दाखिले के लिए 75 फीसदी अंकों की न्यूनतम शर्त लागू

चार साल की स्नातक डिग्री के बाद सीधे पीएचडी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक या समकक्ष सीजीपीए होना अनिवार्य है। डीयू ने आरक्षित वर्गों जैसे एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी है, जिससे उनके लिए पात्रता 70 फीसदी हो जाती है।

3-वर्षीय ग्रेजुएशन और मास्टर्स करने वालों के लिए नियम

पुरानी 3-वर्षीय ग्रेजुएशन प्रणाली के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए मास्टर्स में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों की शर्त पहले की तरह ही लागू रहेगी। वहीं, 4 साल के ग्रेजुएशन के बाद 1 साल की मास्टर्स डिग्री पूरी करने वालों को भी मास्टर्स स्तर पर 55 फीसदी अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50 फीसदी) लाने होंगे।

राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन

4-वर्षीय स्नातक के बाद सीधे पीएचडी में आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा आयोजित इंटरव्यू में प्रदर्शन के आधार पर दाखिला मिलेगा। इस पहल से विश्वविद्यालय में शोध के स्तर में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News