बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में गोपाल सिंह नेपाली और पं हंस कुमार तिवारी की जयंती मनी, पीर मूनिस को किया याद

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Patna News: बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में प्रसिद्ध गीतकार गोपाल सिंह नेपाली और अनुवादक पं हंस कुमार तिवारी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर चंपारण सत्याग्रही पीर मोहम्मद मूनिस को भी याद किया गया। सम्मेलन में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने की।

अध्यक्षीय भाषण में डा अनिल सुलभ ने कहा कि गोपाल सिंह नेपाली के रोम-रोम में गीत समाए हुए थे। उनकी रचनाएं दिल को छू लेने वाली होती थीं। जब 21 वर्ष की आयु में 1932 में उन्होंने वाराणसी में काव्य-पाठ किया, तो आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भी चकित रह गए थे।

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द्विवेदी जी ने उनसे पूछा था, “क्या तुम कविताई अपनी माँ के पेट से सीख कर आए हो?” डा सुलभ ने कहा कि नेपाली प्रेम, प्रकृति, राष्ट्रीय चेतना और दर्शन के लोकप्रिय गीतकार थे। मंचों पर केवल दिनकर, बच्चन और जानकी वल्लभ शास्त्री ही उनसे मुकाबला कर सकते थे।

चीन आक्रमण के समय उनकी प्रसिद्ध रचना ‘हिमालय ने पुकारा’ ने जवानों में भारी उत्साह भरा था। उन्होंने सीमाओं पर जाकर भारतीय सेना का हौसला बढ़ाया था। चीन की सरकार सेना से ज्यादा नेपाली के गीतों से डरती थी। इसलिए उन्हें ‘वन मैन आर्मी’ कहा जाने लगा था।

डा सुलभ ने पं हंस कुमार तिवारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अनुवाद विधा को हिंदी में विशेष सम्मान दिलाया। उन्होंने बांग्ला साहित्य का प्रचुर अनुवाद किया। साथ ही संस्थापकों में शामिल स्वतंत्रता सेनानी पीर मोहम्मद मूनिस को भी स्मृति दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम में कवि सम्मेलन की शुरुआत चंदा मिश्र की सरस्वती वंदना से हुई। डा रत्नेश्वर सिंह, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, विपिन विप्लवी और पल्लवी विश्वास समेत कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मानंद पाण्डेय ने और धन्यवाद ज्ञापन कृष्णरंजन सिंह ने किया।

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Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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