12 अगस्त 2026 को लगेगा दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण, दिन में छाएगा अंधेरा और यूरोप में दिखेगा अद्भुत नजारा

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New Delhi News: खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए 12 अगस्त 2026 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। सावन की हरियाली अमावस्या पर एक दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इस दौरान चंद्रमा सूरज को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे कुछ समय के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा।

यूरोप में 27 साल बाद दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण का मंजर

वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप की मुख्य भूमि पर करीब 27 साल बाद (1999 के बाद) ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा। ब्रिटेन में करीब तीन दशकों बाद सूर्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिपता नजर आएगा। इसके बाद ऐसा दुर्लभ नजारा 64 साल बाद 23 अगस्त 2090 को ही दोबारा देखा जा सकेगा।

लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक रहेगा घोर अंधकार

ग्रहण के दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूरज को पूरी तरह ढक देगा। यह घोर अंधकार करीब 2 मिनट 18 सेकंड तक रहेगा। इस दौरान अचानक तापमान में गिरावट आएगी और दिन में तारे दिखाई देंगे। सूर्य का आकार चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, लेकिन 400 गुना दूर होने के कारण दोनों समान दिखते हैं।

भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, रात के समय होगी शुरुआत

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। भारत में रात का समय होने के कारण इसका प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं किया जा सकेगा।

प्रकृति में दिखेंगे बदलाव, पक्षी लौटेंगे घोंसलों की ओर

खगोलविदों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण के चरम पर पहुंचते ही तापमान तेजी से गिरेगा और हवा में नमी बढ़ जाएगी। सूरज की रोशनी बंद होने से पशु-पक्षी इसे रात समझकर शांत हो जाएंगे और अपने घोंसलों की ओर लौटने लगेंगे। दिन के उजाले में अचानक रात का अहसास प्रकृति में बड़ा बदलाव लाएगा।

भारत में सूतक काल मान्य नहीं, मंदिर के कपाट रहेंगे खुले

रात के समय ग्रहण लगने के कारण भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है। भारत में सूतक न लगने के कारण मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य दिनचर्या तथा पूजा-पाठ पर कोई पाबंदी लागू नहीं होगी।

ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन में दिखेगा ‘महा-ग्रहण’

इस अद्भुत नजारे को सबसे पहले ग्रीनलैंड के आर्कटिक फियोर्ड्स में देखा जा सकेगा। इसके बाद यह आइसलैंड और स्पेन में नजर आएगा। स्पेन में सूर्यास्त से ठीक पहले यह दृश्य दिखाई देगा, जो फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन अवसर होगा। यूरोप के लोग सालों बाद इस दुर्लभ घटना के गवाह बनेंगे।

आंखों की सुरक्षा के लिए सोलर एक्लिप्स ग्लासेज का करें इस्तेमाल

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इससे आंखों की रोशनी जा सकती है या धुंधलापन हो सकता है। ग्रहण देखते समय ‘सोलर एक्लिप्स ग्लासेज’ का प्रयोग करें। आंखों में जलन या दर्द महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

Desh Raj
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