श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार बन रहे हैं 7 अत्यंत शुभ दुर्लभ योग, जानें सही तिथि, महामुहूर्त और लड्डू गोपाल की संपूर्ण पूजन विधि

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National News: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर देशभर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा। साल 2026 में जन्माष्टमी का त्योहार 4 सितंबर को पड़ रहा है। इस बार ग्रहों और नक्षत्रों के अद्भुत संयोग से 7 अत्यंत कल्याणकारी योग बन रहे हैं।

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर को देर रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर को रात 12:13 बजे समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं में कान्हा के जन्म के समय मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है। इसी गणना के आधार पर 4 सितंबर को ही जन्मोत्सव मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।

जन्माष्टमी पर 7 दुर्लभ योग और पूजा के विशेष महामुहूर्त

ज्योतिष गणना के अनुसार इस पावन अवसर पर जयंती, सर्वार्थ सिद्धि, हर्षण, हंस, मालव्य, बुधादित्य और नवपंचम योग एक साथ सक्रिय रहेंगे। इन योगों में पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 11:55 से 12:45 तक और रात्रि निशिता काल 11:57 से 12:43 तक रहेगा।

दिनभर की साधना के लिए अमृत, लाभ और शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही घर में विराजमान लड्डू गोपाल की सेवा और भोग के नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। बाल गोपाल को हमेशा सात्विक भोजन, शुद्ध बर्तन और तुलसी दल के साथ ही प्रेमपूर्वक भोग अर्पित करना चाहिए।

लड्डू गोपाल की प्राकट्य पूजा और विशेष अर्पण विधि

जन्माष्टमी पर घर के मंदिर को दीपों और फूलों से सजाकर बाल गोपाल के लिए सुंदर झूला तैयार करें। मध्यरात्रि में कान्हा का प्राकट्य उत्सव मनाते हुए उन्हें पंचामृत एवं गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद नए वस्त्र पहनाकर रोली, अक्षत और तुलसी दल सहित माखन-मिश्री का प्रिय भोग श्रद्धाभाव से लगाएं।

Desh Raj
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