धनतेरस पर अमृत कलश लेकर क्यों प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि? जानिए समुद्र मंथन से जुड़ी पौराणिक कथा

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National News: धनतेरस केवल सोने-चांदी की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया की कामना का पावन दिन भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनका यह स्वरूप धन संपदा के साथ मानव जीवन में आरोग्य और दीर्घायु के सर्वोच्च महत्व का संदेश देता है।

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर लोग इस दिन को सोना, चांदी, बर्तन और नए सामान की खरीदारी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका एक गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक आधार भगवान धन्वंतरि की उपासना से जुड़ा है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है।

समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य

पौराणिक कथा के अनुसार, जब अमरता की प्राप्ति के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। भगवान विष्णु ने कच्छप रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर सहारा दिया। इस मंथन के दौरान माता लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, उच्चैःश्रवा घोड़ा, कौस्तुभ मणि और कल्पवृक्ष समेत कई दिव्य रत्न निकले। समुद्र से हलाहल विष भी निकला, जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की।

श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कंध के आठवें अध्याय में वर्णित प्रसंग के अनुसार, निरंतर मंथन के पश्चात समुद्र से एक दिव्य पुरुष हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए। यही आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धन्वंतरि थे।

अमृत कलश और उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक

भगवान धन्वंतरि के हाथों में अमृत कलश का होना केवल देवताओं की अमरता से नहीं, बल्कि मानव शरीर की आरोग्यता और लंबी उम्र से भी जुड़ा है। आयुर्वेद जीवन को निरोगी बनाए रखने और रोगों के निवारण का विज्ञान है। शास्त्रों के अनुसार, अमृत का वास्तविक संदेश यह है कि स्वस्थ शरीर ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यही कारण है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना कर परिवार के सुख-स्वास्थ्य की मंगलकामना की जाती है।

मोहिनी अवतार और अमृत का वितरण

समुद्र मंथन से जैसे ही भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर बाहर आए, असुरों ने उनसे वह कलश छीन लिया। अमृत को असुरों के हाथ में जाने से बचाने और देवताओं की सहायता के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। अपने अद्वितीय सौंदर्य और सम्मोहन से उन्होंने असुरों को मोहित कर लिया और अमृत वितरण का दायित्व अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद मोहिनी स्वरूप भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृत का पान कराया, जिससे उन्हें अमरत्व प्राप्त हुआ।

धन के साथ स्वास्थ्य की संभाल का संदेश

भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य उत्सव यह स्मरण कराता है कि जीवन में भौतिक संपदा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। धनतेरस के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर आयुर्वेद से जुड़े विचार-विमर्श और सत्र भी आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व हमें खरीदारी के आनंद के साथ-साथ अपनी दिनचर्या, खानपान और जीवनशैली को संतुलित रखने का पावन संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

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