New Delhi: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले सही मुहूर्त और समय देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ समय को बेहद अशुभ माना गया है, जिनमें पंचक प्रमुख है। इस साल 31 जुलाई 2026 से पंचक की शुरुआत हो रही है, जो विशेष सावधानी बरतने का संकेत है।
शुक्रवार से शुरू होने के कारण शास्त्रों में इसे चोर पंचक कहा गया है। इस दौरान धन हानि और चोरी का खतरा बना रहता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब पंचक शुरू होता है और रेवती नक्षत्र से निकलने के साथ ही यह समाप्त हो जाता है।
चोर पंचक के दौरान भूलकर भी न करें ये कार्य
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पंचक के पांच दिनों में कुछ खास कामों पर रोक रहती है ताकि अनहोनी से बचा जा सके। इन दिनों शव का अंतिम संस्कार करना मना है, क्योंकि इससे परिवार या पड़ोस में पांच लोगों की मृत्यु का भय रहता है। दक्षिण दिशा यमराज की मानी गई है, इसलिए यात्रा वर्जित है।
धनिष्ठा नक्षत्र में आग का खतरा रहने के कारण लकड़ी, घास और ईंधन इकट्ठा नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, रेवती नक्षत्र में घर की छत ढलवाने से धन हानि और क्लेश होता है। पंचक के पांच दिनों में नई चारपाई या पलंग बनवाने की भी सख्त मनाही शास्त्रों में बताई गई है।
अशुभ प्रभाव से बचने के आसान और अचूक उपाय
यदि पंचक काल में लकड़ी का सामान खरीदना बहुत जरूरी हो, तो गायत्री यज्ञ कराने का विधान है। दक्षिण दिशा की यात्रा टालना संभव न हो, तो हनुमान मंदिर में पांच फल चढ़ाकर ही निकलें। मकान की छत बनवाना अनिवार्य होने पर मजदूरों को मिठाई खिलाने के बाद ही काम शुरू कराएं।
अगर नया पलंग या चारपाई बनवाना आवश्यक हो, तो उसका इस्तेमाल पंचक खत्म होने के बाद ही करें। किसी की मृत्यु होने पर शवदाह के समय कुशा के पांच पुतले बनाकर चिता के साथ जलाएं। ध्यान रखें कि किसी भी उपाय को शुरू करने से पहले अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप जरूर करें।