Ayodhya News: अयोध्या के भव्य राम मंदिर के प्रबंधन के लिए पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की चयन प्रक्रिया जारी है। कुल 5,200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चुना गया है। मंगलवार को आठ अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में प्रशासनिक क्षमता और धार्मिक जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे गए।
साक्षात्कार से पहले अभ्यर्थियों से 34 सवालों का एक गूगल फॉर्म भरवाया गया था। इसमें शिखा रखने, जनेऊ पहनने, खान-पान और शराब के सेवन से संबंधित सीधे प्रश्न शामिल थे। इसके अतिरिक्त, उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वे खुद को कट्टर हिंदू मानते हैं और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पहनावे में सहज हैं।
प्रशासनिक अनुभव और भीड़ प्रबंधन को चयन का प्रमुख आधार बनाया गया है। अभ्यर्थियों से बड़े संस्थानों के प्रबंधन, टीम नेतृत्व और आपात स्थितियों में त्वरित फैसले लेने की क्षमता पर सवाल किए गए। मंदिर में रोजाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अलावा भगवान राम में आस्था, सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव और मंदिर की व्यवस्था सुधारने की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। पूर्व में हुए ऑनलाइन साक्षात्कार के बाद अब आमने-सामने की प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। चयन बोर्ड उम्मीदवारों के पिछले कार्य अनुभव और पारिवारिक पृष्ठभूमि को भी परख रहा है।
साक्षात्कार प्रक्रिया सोमवार देर रात अयोध्या पहुंचे उम्मीदवारों के साथ शुरू हुई। मंगलवार सुबह 9 बजे अभ्यर्थी राम मंदिर परिसर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र पहुंचे, जहां सुबह 10 बजे से पहले चरण के साक्षात्कार आयोजित किए गए। पहले दिन 18 में से आठ उम्मीदवारों की परीक्षा पूरी हो सकी।
चयन प्रक्रिया को पूरा करने में अब चार दिन का समय लगने की संभावना है। मंदिर परिसर में चढ़ावे से जुड़ी वित्तीय अनियमतताओं की शिकायतों के बाद ट्रस्ट ने पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति का निर्णय लिया था। यह अधिकारी पूरे परिसर के दैनिक कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेगा।
चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं। यह समिति चयनित तीन नामों का अंतिम पैनल बनाकर 2 सितंबर से पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। नियुक्ति पर अंतिम फैसला ट्रस्ट का बोर्ड ही करेगा।
नए सीईओ पर वित्तीय, कानूनी, प्रशासनिक और बड़े धार्मिक आयोजनों के सफल आयोजन का जिम्मा होगा। सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना और श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी मुख्य प्राथमिकता होगी। इसलिए चयन में प्रशासनिक दक्षता और धार्मिक निष्ठा दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है।