Delhi News: विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने शुक्रवार को लगातार चौथे दिन संसद से लेकर राष्ट्रपति भवन तक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी की अगुवाई में 10 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
संसद भवन के सेंट्रल हॉल में शाम को सहयोगी दलों की एक अहम बैठक हुई। इसके बाद सभी सांसदों और बड़े नेताओं ने राष्ट्रपति भवन की ओर पैदल मार्च निकाला। राहुल गांधी के नेतृत्व में 10 सदस्यों का दल अंदर गया। इस दल ने राष्ट्रपति से मिलकर अपनी मांगें उनके सामने रखीं।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी शामिल रहे। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा के एमए बेबी और भाकपा के डी राजा भी मौजूद रहे। इसके अलावा सपा सांसद राजीव राय भी इस मुलाकात का हिस्सा बने।
इस दल में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले, राजद के मनोज झा और तमिलनाडु के नेता टी तिरुमावलवन भी शामिल थे। इन नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर व्यवस्था को पूरी तरह रद्द करने की मांग उठाई।
दूसरी तरफ, बाकी सांसद प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विजय चौक पर सड़क पर धरने पर बैठ गए। उनके साथ कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केसी वेणुगोपाल, महुआ मोइत्रा, अभिषेक बनर्जी और गौरव गोगोई मौजूद रहे। सांसदों ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति से संविधान बचाने की पूरी उम्मीद है।
धरने को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि समस्या केवल चुनाव आयुक्त तक सीमित नहीं है। इसके लिए वर्तमान सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र को बचाने की बड़ी लड़ाई है। अगर सभी दल एकजुट होकर ऐसा ही दबाव बनाए रखेंगे, तो यह सरकार जरूर गिर जाएगी।
गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलने तक से बच रहे हैं। उन्होंने पूरे तंत्र पर सवाल उठाते हुए अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। विपक्ष का दावा है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होगा, ताकि जनता की आवाज को मजबूती मिल सके।
