राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए आरोप, कानूनी प्रावधान गिरफ्तारी की मांग के बीच बना ढाल

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Delhi News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकारी गवाह बनने की सलाह दी है। विपक्षी दल कथित वोटर लिस्ट हेरफेर के मामले में उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, चीफ इलेक्शन कमिश्नर एक्ट का कानूनी प्रावधान इस मांग के सामने ढाल बनकर खड़ा है।

कानूनी प्रावधान बना चुनाव आयुक्तों की ढाल

चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स एक्ट 2023 की धारा 16 के तहत मौजूदा या पूर्व चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इस नियम के अनुसार, आधिकारिक ड्यूटी के दौरान किए गए किसी भी कार्य के लिए उनके खिलाफ कोई सिविल या क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया जा सकता है।

मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह कानून तैयार हुआ था। संसद से पारित इस कानून की चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद जोड़े गए सुरक्षा प्रावधान के चलते किसी भी अदालत द्वारा पद पर रहते हुए लिए फैसलों पर सीधी कार्रवाई नहीं हो सकती।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कानूनी पेंच

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने तर्क दिया कि वोटर लिस्ट में किसी भी प्रकार की हेरफेर चुनाव आयुक्त के आधिकारिक कार्यक्षेत्र में नहीं आती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान सिर्फ राष्ट्रपति और राज्यपाल को पूर्ण छूट देता है, इसलिए मामले में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और बीएनएस के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने इस सुरक्षा कवच को छूट का तोहफा बताया है। दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में स्पष्ट किया था कि यह प्रावधान केवल जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के नियमों को दोहराता है। इस कानूनी व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।

विपक्षी दलों ने एकजुट होकर उठाए सवाल

राहुल गांधी के साथ-साथ अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी ने भी मतदाता सूची में संशोधन प्रक्रिया को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का दावा है कि विभिन्न राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इस मुद्दे पर कई अन्य राजनीतिक दल भी जांच की मांग में शामिल हो गए हैं।

इससे पहले संसद में चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए लाए गए नोटिस को लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति ने अस्वीकार कर दिया था। वर्तमान में शीर्ष अदालत में धारा 16 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कानूनी प्रक्रिया जारी है, जिस पर आगे की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय की जानी है।

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