संसद में मकर द्वार के बाहर भिड़े बीजेपी और कांग्रेस सांसद, मॉनसून सत्र में गतिरोध और विधेयकों पर विवाद गहराया

Share

- Advertisement -

Delhi News: संसद परिसर के मकर द्वार के बाहर मंगलवार को बीजेपी और कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नारेबाजी और हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। मॉनसून सत्र में दिल्ली छात्र प्रदर्शन, अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, वंदे मातरम संशोधन और एफसीआरए बिल पर गतिरोध बना हुआ है।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने संसद परिसर का वीडियो क्लिप शेयर कर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक से रिपोर्टिंग करते हुए ऐसी स्थिति नहीं देखी। कोविड के समय सेंट्रल हॉल बंद होने से विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आपसी संवाद का मंच खत्म हो गया है।

राजदीप सरदेसाई के अनुसार सत्तारूढ़ दल संसद को सिर्फ एक नोटिस बोर्ड समझता है। वहीं विपक्ष इसे केवल अपनी नाराजगी जाहिर करने का जरिया मानता है। सांसद बिना किसी सोच के पाला बदल लेते हैं। बहुत कम सांसद ही असल संसदीय कामकाज में मेहनत करने के इच्छुक नजर आते हैं।

विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अयोध्या राम मंदिर चंदे में गबन पर भी बहस की मांग की गई है। जवाब में बीजेपी सांसदों ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए झारखंड छात्र प्रदर्शन का मुद्दा उठाया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देने को तैयार हैं। हालांकि इसके लिए सदन का चलना जरूरी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि वे अमित शाह का भाषण नहीं, बल्कि सीधा जवाब चाहते हैं।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार साफ बताए कि क्या अमित शाह ने बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि अमित शाह को भाषण लिखने में 21 दिन लग गए और उनका बयान आरएसएस शाखा के लिए सही है।

प्रियंका गांधी के संसद पहुंचने पर बीजेपी सांसद मुकेश दलाल ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से पहले ही मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सरकार के सांसदों को भी विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर कर दिया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वंदे मातरम संशोधन कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को हर सरकारी कार्यक्रम के आगे-पीछे गाने में 12 मिनट लगेंगे। कानून बनाकर लोगों के मन में सम्मान और धैर्य जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता।

विदेशी फंडिंग को कड़ा करने वाले एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 पर भी भारी विवाद जारी है। तमिलनाडु विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ और मिजोरम में प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार अब इस बिल को समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की तैयारी में है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

Read more

Related News