Shimla News: हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में वोट और सरकारें चोरी होने के कई मामलों का पर्दाफाश हो चुका है। अब चुनाव आयोग की भूमिका पर संदेह गहराने लगा है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने का लगाया आरोप
अग्निहोत्री ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए गए। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने भी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने पर उठे सवालों के बाद देशभर में बहस छिड़ी है। आरोप चुनाव आयोग पर लग रहे हैं, लेकिन बचाव भारतीय जनता पार्टी के नेता कर रहे हैं। राहुल गांधी लंबे समय से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठा रहे हैं, जो अब बेहद गंभीर बन चुका है।
गड़बड़ी वाले राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की रखी मांग
मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ केस दर्ज करने और उन्हें पद से तुरंत हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई, वहां दोबारा मतदान कराया जाए। केंद्र सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट की रक्षा बेहद जरूरी है।