Delhi News: उच्चतम न्यायालय ने करीब 10 साल पुराने दुष्कर्म के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 20 साल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की कम उम्र और जेल में उसके अच्छे आचरण को देखते हुए यह राहत दी है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। पीठ ने कहा कि जब अपराध हुआ था, तब दोषी की उम्र केवल 25 साल थी। अदालत के अनुसार, दोषी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे सुधार की गुंजाइश दिखती है।
जेल में अच्छा आचरण बना सजा कम होने की वजह
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे लगे कि उसमें सुधार संभव नहीं है। लगभग दस साल की जेल के दौरान याचिकाकर्ता का व्यवहार अच्छा रहा है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को सजा में छूट का लाभ देने का फैसला सुनाया।
यह मामला साल 2016 का है, जब पीड़ित महिला ने दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि दिल्ली रेलवे स्टेशन से लिया गया रिक्शा चालक उसे सुनसान जगह ले गया। वहां पहले से मौजूद व्यक्ति और चालक ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया था।
इस शिकायत पर 27 सितंबर 2016 को एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में निचली अदालत ने आरोपी को जीवनभर के लिए कठोर कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है।