Delhi News: नीट पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर 28 जून से जारी सोनम वांगचुक का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर है। वांगचुक का अनशन 23वें दिन भी अस्पताल में जारी रहा। वहीं 20 जुलाई को तीन छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी और जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारी जुटे।
23वें दिन तीन छात्रों ने तोड़ी भूख हड़ताल
आंदोलन की शुरुआत में सोनम वांगचुक के साथ आयसा (AISA) के तीन छात्र नेहा, मनीष और अमीन अनशन पर बैठे थे। 20 जुलाई को 23 दिन पूरे होने पर तीनों ने हड़ताल खत्म कर दी। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार अनशन से उनका वजन 12 फीसदी घट गया था और ब्लड शुगर स्तर खतरनाक गिर गया था।
दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। पत्नी गीतांजलि अंगमो के अनुसार वह अस्पताल में भी अनशन पर हैं। उनके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू कर दिया है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जुटी महिलाएं
इस आंदोलन में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी भारी भागीदारी देखी गई। आयसा अध्यक्ष नेहा ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया, वहीं वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने मीडिया प्रवक्ता की भूमिका निभाई। जंतर-मंतर पर महिला शिक्षिकाएं, छात्राएं, पूर्व सैनिक, वकील और बुजुर्ग महिलाएं भी मांगों के समर्थन में लगातार डटी रहीं।
विपक्षी दलों के नेताओं का मिला समर्थन
सोनम वांगचुक के इस अनशन को कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों और दलों का व्यापक समर्थन मिला। अरविंद केजरीवाल, डिम्पल यादव, पवन खेड़ा, सुप्रिया सुले, अमरा राम, चंद्रशेखर आजाद और अभिनेता प्रकाश राज ने जंतर-मंतर पहुंचकर मुलाकात की। सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी ने भी आंदोलन का समर्थन किया।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रमुख मांगें
शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, जांच और मृतक छात्रों के परिजनों को मुआवजे की थी। हालांकि 20 जुलाई तक वांगचुक ने मांगों में बदलाव करते हुए सरकार से शिक्षा तंत्र की विफलता स्वीकार करने और संसद में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा कराने का आश्वासन मांगा।
केंद्र सरकार का कड़ा रुख और अदालती फैसला
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की है। वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के पुलिस प्रशासन के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया। कोर्ट के अनुसार वांगचुक के इनकार के बावजूद उनकी नाजुक सेहत को देखते हुए अस्पताल पहुंचाना कानून के दायरे में था।