Delhi News: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और कानूनी छूट पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चिंता जताई है। पायलट ने मतदाता सूची से 13.3 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताया। इस बीच इंडिया गठबंधन ने CEC के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग और रामलीला मैदान में महारैली की योजना बनाई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को प्राप्त कानूनी छूट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था और प्रावधानों से भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गहरा संकट पैदा हो रहा है। पायलट ने जोर देकर कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में जनता का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा कायम रहना और उसे लगातार मजबूत किया जाना बेहद आवश्यक है।
एक साक्षात्कार के दौरान सचिन पायलट ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जुड़े विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की सबसे बुनियादी नींव है और इस तरह बड़ी संख्या में नाम कटना सीधे तौर पर नागरिकों के इस अधिकार के सामने एक बड़ी चुनौती है।
संस्थाओं की साख और निष्पक्षता पर चिंता
चुनाव आयोग की भूमिका पर तंज कसते हुए सचिन पायलट ने कहा, “अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो, तो खेलने का क्या मतलब रह जाता है?” उन्होंने कहा कि पूरा लोकतांत्रिक ढांचा जनता के भरोसे पर चलता है। अगर व्यवस्था पर ही सवाल उठने लगें और संचालन करने वाले व्यक्ति की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ जाए, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की कल्पना करना कठिन हो जाता है।
पायलट ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कथित गलत कदमों के लिए ठोस डेटा और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों को लेकर विपक्ष लगातार आवाज उठा रहा है ताकि संस्थागत जवाबदेही तय की जा सके।
संसद में गतिरोध और विपक्ष का रुख
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर संसद के भीतर विपक्ष के सवालों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद के कई सत्रों से चला आ रहा गतिरोध सरकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये का परिणाम है, क्योंकि वह जनता और विपक्ष की शंकाओं का समाधान करने में विफल रही है। पायलट के अनुसार, जब सदन के भीतर जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तो विपक्ष और नागरिकों के लिए इन विषयों को सार्वजनिक पटल पर उठाना पूरी तरह से उचित और अनिवार्य हो जाता है।
इंडिया गठबंधन का ‘सार्वजनिक महाभियोग’ कार्यक्रम
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच इंडिया गठबंधन ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ‘सार्वजनिक महाभियोग’ (public impeachment) कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। इससे पहले राजधानी में बारिश के कारण शुक्रवार को होने वाला यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। इसके साथ ही इंडिया गठबंधन ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में एक मेगा रैली की भी रूपरेखा तैयार की है।