Delhi News: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन अधिनियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत के गायन में व्यवधान डालने पर कड़ा जुर्माना और तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
यह नया कानून वर्ष 1971 के पुराने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तुत करता है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद 6 अगस्त 2026 को इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों का अपमान रोकना है।
कानून में किए गए बदलाव के तहत पुराने अधिनियम की धारा 3 को नए कानूनी प्रावधानों से बदला गया है। नई धारा 3 के अंतर्गत राष्ट्रगान के साथ अब राष्ट्रगीत को भी शामिल किया गया है। यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि देश की राष्ट्रीय पहचान से जुड़े इन दोनों ही प्रतीकों को समान कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो।
नए कानून के प्रावधानों में कड़ी सजा तय की गई है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है या सभा में बाधा डालता है तो उसे दोषी माना जाएगा। अदालत अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को तीन साल की जेल, जुर्माना या फिर दोनों की सजा दे सकती है।
एडवोकेट मनीष भदौरिया के अनुसार यह संशोधन राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति नागरिकों के संवैधानिक कर्तव्यों को और अधिक स्पष्ट करता है। अब पुलिस और प्रशासन को राष्ट्रगीत के अनादर के मामलों में सीधी कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है। राष्ट्रगीत के दौरान पूरा अनुशासन और सम्मान बनाए रखना हर नागरिक की कानूनी जिम्मेदारी है।