धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी पर ही क्यों जताया भरोसा, जानिए सरकार की पूरी रणनीति

Share

- Advertisement -

Delhi News: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे दो बड़े मंत्रालय संभाल रहे हैं। संकट के इस समय में सरकार ने अपने सबसे अनुभवी और भरोसेमंद नेता पर विश्वास जताया है ताकि प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे।

लगभग पांच साल तक शिक्षा मंत्रालय संभालने वाले धर्मेंद्र प्रधान की विदाई के बाद नए नेतृत्व पर सबकी नजरें टिकी हैं। प्रह्लाद जोशी को लंबा प्रशासनिक अनुभव हासिल है। वे वर्ष 2019 से 2024 तक संसदीय कार्यमंत्री के रूप में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तालमेल बिठाने और संसद चलाने का काम कुशलता से देख चुके हैं।

शिक्षा मंत्रालय के सामने हैं कई बड़ी प्रशासनिक चुनौतियां

नीट पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय को लगातार तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों परीक्षार्थियों और युवाओं का डगमगाया भरोसा दोबारा कायम करने की होगी। इसके लिए परीक्षा प्रणाली की खामियों को दूर कर उसमें त्वरित सुधार करना बेहद जरूरी होगा।

वर्तमान में संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है, जहां विपक्ष पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। ऐसे माहौल में छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना आवश्यक है। सरकार को यह संदेश देना होगा कि वह नकल और पेपर लीक के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठा रही है।

संकट के समय प्रशासनिक निरंतरता पर सरकार का जोर

शिक्षा मंत्रालय को संकट से निकालकर उसमें प्रशासनिक स्थिरता लाना वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। एक वरिष्ठ और भरोसेमंद नेता को अतिरिक्त प्रभार देना सरकार की स्पष्ट सोच को दिखाता है। इससे साफ संदेश मिलता है कि सरकार किसी त्वरित राजनीतिक हल के बजाय लंबे समय तक चलने वाले प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दे रही है।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News