Mumbai News: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. एफडीए ने आरोप लगाया है कि इलायची का विज्ञापन वास्तव में राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद का सरोगेट या परोक्ष प्रचार करता है.
यह कानूनी नोटिस 14 अगस्त को तीनों अभिनेताओं को भेजा गया है. शाहरुख खान को उनके बांद्रा स्थित बंगले मन्नत, अजय देवगन को जुहू स्थित निवास और टाइगर श्रॉफ को उनकी कंपनी टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी के पते पर नोटिस भेजा गया है. इस कार्रवाई के बाद फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है.
एफडीए का कहना है कि विज्ञापन का प्रेजेंटेशन, संवाद, ब्रांड नेम और बाजार का माहौल यह सवाल खड़े करता है कि क्या यह तंबाकू उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार है. नोटिस में लिखा है कि शुरुआती जांच में यह विज्ञापन विमल ब्रांड का प्रचार लगता है, जो सीधे तौर पर पान मसाला से जुड़ा हुआ है.
नोटिस के जरिए तीनों अभिनेताओं से दस्तावेजी सबूत मांगे गए हैं. एफडीए यह जांचना चाहता है कि क्या ‘विमल इलायची’ बाजार में बिकने वाला एक स्वतंत्र प्रोडक्ट है, या फिर यह बैन पान मसाला और तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किया गया एक सरोगेट या ब्रांड एक्सटेंशन प्रमोशन है.
एफडीए ने आदेश में अभिनेताओं से अपने एंडोर्समेंट एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ, प्रोडक्ट डिटेल्स और पेमेंट से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं की कॉपियां मांगी हैं. इसके साथ ही इस पूरे कैंपेन में शामिल एडवरटाइजिंग एजेंसी और ब्रांड के असली मालिक से जुड़ी पूरी जानकारी भी जमा करने के निर्देश दिए गए हैं.
एफडीए ने उन सभी टीवी चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया हैंडल्स और अन्य मीडिया माध्यमों का ब्योरा मांगा है, जिन पर यह विज्ञापन प्रसारित हुआ. उनसे यह भी बताने को कहा गया है कि ये विज्ञापन कब तक चलाए गए और अभिनेताओं का ब्रांड मालिक से किस तरह का संबंध है.
तीनों अभिनेताओं को नोटिस मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब और जरूरी सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे. वे चाहें तो खुद या अपने लीगल रिप्रेजेंटेटिव के जरिए पर्सनल हियरिंग की मांग कर सकते हैं. तय समय पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी.
खाद्य सुरक्षा कानून (एफएसएस एक्ट 2006) की धारा 30(2)(a) के तहत महाराष्ट्र सरकार ने 13 जुलाई 2026 से एक साल के लिए पान मसाला के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है. राज्य में साल 2012 से ही गुटखा और पान मसाला पर बैन लागू है, जिसे हर साल बढ़ाया जाता है.
एफडीए ने इस मामले में एफएसएस एक्ट 2006 की धारा 24 और 53 के तहत कार्रवाई की है. धारा 24 भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाती है, जबकि धारा 53 भ्रामक प्रचार करने या उसका हिस्सा बनने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करती है. ब्रांड एंडोर्समेंट के कारण तीनों की निजी जवाबदेही की जांच जारी है.