New Delhi News: देश के करीब 218 जिलों में सूखे जैसे गंभीर हालात बनते जा रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इंडेक्स के अनुसार, इन क्षेत्रों को मध्यम, गंभीर या अत्यधिक सूखे की श्रेणी में रखा गया है। कम बारिश ने फसलों और जल संकट की चिंता बढ़ा दी है।
आंकड़ों के अनुसार 13 अगस्त से 9 सितंबर 2026 के बीच इन जिलों की स्थिति तेजी से बिगड़ी है। साल 2023 की इसी अवधि में ऐसी श्रेणियों में 188 जिले दर्ज थे। हालांकि तब कुल प्रभावित जिलों की संख्या 469 थी, जो इस बार घटकर 454 रह गई है। इसका मतलब है कि सामान्य से कम बारिश वाले जिले अब गंभीर सूखे में बदल रहे हैं।
मराठवाड़ा, विदर्भ और गुजरात समेत कई राज्यों में संकट गहराया
मौसम विभाग के नक्शे के मुताबिक महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में हालात बेहद नाजुक हैं। इसके अलावा गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मेघालय और पंजाब-हरियाणा के कई इलाकों में भी बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। इन राज्यों के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरने से परेशानी बढ़ रही है।
दूसरी तरफ अत्यधिक बारिश वाले जिलों की संख्या भी 58 से बढ़कर 86 हो गई है। यह बदलाव मौसम के दोनों चरम स्तरों को दर्शाता है। आईएमडी पुणे के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सत्यबान बिशोयी रत्ना के अनुसार, पिछले चार हफ्तों से जारी यह सूखापन फसलों के विकास और स्थानीय जल संसाधनों पर सीधा नकारात्मक असर डालेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और फसलों की पैदावार पर सीधा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ता है, जहां पूरी खेती और दिनचर्या मानसूनी पानी पर टिकी होती है। शहरों में टैंकरों से जलापूर्ति संभव है, लेकिन गांवों में खेती सूखने से उपज प्रभावित होगी। यदि यह स्थिति कुछ दिन और खिंची तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।