Delhi News: भारतीय वायुसेना की कमान संभालने के तुरंत बाद नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के. से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में HAL प्रमुख ने वायुसेना प्रमुख को स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A सहित अन्य प्रमुख रक्षा परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और डिलीवरी टाइमलाइन से अवगत कराया।
31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करने वाले एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया है। वायुसेना के सामने लड़ाकू विमानों की घटती स्क्वाड्रन क्षमता और आधुनिकीकरण की दोहरी चुनौती है, जिसे देखते हुए देश की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी HAL के साथ यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
तेजस Mk1A, Mk2 और AMCA परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक के दौरान HAL के सीएमडी रवि के. ने वायुसेना प्रमुख को कंपनी में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति से रूबरू कराया। इसमें सबसे प्रमुख तेजस Mk1A की आपूर्ति प्रक्रिया रही, जिसका भारतीय वायुसेना लंबे समय से इंतजार कर रही है। नए वायुसेना प्रमुख ने अपने विजन में स्पष्ट किया है कि तेजस Mk1A, तेजस Mk2 और 5वीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों को गति देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा देश में विकसित उन्नत सेंसर और हथियार प्रणालियों के एकीकरण पर भी बल दिया गया।
डिलीवरी में देरी और पूर्व वायुसेना प्रमुख की तल्ख टिप्पणी की पृष्ठभूमि
वायुसेना और HAL के बीच यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि पूर्व में तेजस विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर रक्षा गलियारों में गंभीर सवाल उठ चुके हैं। फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से HAL की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि लगातार देरी के चलते फिलहाल उन्हें HAL पर भरोसा नहीं रहा है, जिसे उन्होंने एक बेहद चिंताजनक स्थिति बताया था। उस बयान के बाद रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में समयबद्ध जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई थी।
रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए तालमेल की नई परीक्षा
नए वायुसेना प्रमुख के समक्ष अब सबसे बड़ी चुनौती HAL के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर डिलीवरी की बाधाओं को दूर करना है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों को घरेलू विनिर्माण के जरिए पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में वायुसेना की तकनीकी अपेक्षाओं और HAL की उत्पादन क्षमता के बीच संतुलन स्थापित करके ही इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में धरातल पर उतारा जा सकता है।