Delhi News: मंगलवार को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला। सांसदों ने युवाओं को लुभाने और एक-दूसरे पर तंज कसने के लिए जेन जी की भाषा का इस्तेमाल किया। नेताओं द्वारा भाषण में ‘डिलुलु’, ‘फोमो’, ‘एमआईए’ और ‘कुचु पुचु’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल से माहौल हल्का-फुल्का हो गया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर साधे तीखे निशाने
लोकसभा में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस हुई। सत्तारूढ़ एनडीए ने इस कानून को पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बताया। दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे सरकार की विफलताओं को छिपाने का प्रयास करार दिया। इस दौरान सांसदों ने अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया पर प्रचलित शब्दों का सहारा लिया।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर कसा तंज
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए युवाओं की भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले 37 दिनों तक एमआईए रहा, फिर उन्हें फोमो हुआ और वे पीएम आवास पहुंचे। आखिर में उन्हें डिलुलु हुआ कि छात्र उनके साथ आएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या का भी दिखा अलग अंदाज
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा पैदा किए गए नीतिगत शून्य को प्रधानमंत्री मोदी ने ‘क्लॉक्ड इट’ करके ठोस समाधान निकाला। वहीं तेजस्वी सूर्या ने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष का यह सोचना कि युवा उनके साथ हैं, इससे बड़ा कोई ‘डिलुलु’ नहीं हो सकता।
हुड्डा का अलग अंदाज और सुप्रिया सुले की आपत्ति
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदर्शनकारी युवाओं का जिक्र करते हुए ‘वास्तेगुनेहुईया’ और ‘कुचु पुचु’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। हालांकि, राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह बहस शब्दों की प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि देश के छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दे पर चर्चा का मंच है।