National News: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले डॉ. जितेंद्र सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं। 2014 से लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे डॉ. सिंह राजनीति में आने से पहले एक विख्यात मधुमेह विशेषज्ञ (डायबिटीज एक्सपर्ट) और प्रोफेसर रहे हैं।
साल 2014 में जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनी, तब जम्मू-कश्मीर से डॉ. जितेंद्र सिंह की केंद्रीय मंत्रिमंडल में एंट्री हुई। 6 नवंबर 1956 को जन्मे डॉ. जितेंद्र सिंह ने 26 मई 2014 को पहली बार केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तब से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल तक वे लगातार मंत्रिमंडल का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं, जो शीर्ष नेतृत्व में उनके प्रति गहरे विश्वास को दर्शाता है।
राजनीतिक परिदृश्य में डॉ. जितेंद्र सिंह को जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रशासनिक संतुलन के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में वे जम्मू-कश्मीर की उधमपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से हुआ। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस कड़े मुकाबले में गुलाम नबी आजाद को 60 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया और तब से लगातार उधमपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
डॉ. जितेंद्र सिंह केंद्र सरकार में कई अहम और रणनीतिक मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहे हैं। वर्तमान में वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। इसके साथ ही वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
उनके कार्यकाल में भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान अभियानों, वैज्ञानिक शोधों और प्रशासनिक सुधारों को गति मिली है। साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र (DoNER) और जम्मू-कश्मीर के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका अहम रही है।
मेडिकल करियर और अंतरराष्ट्रीय पहचान
राजनीति में कदम रखने से पूर्व डॉ. जितेंद्र सिंह का मुख्य कार्यक्षेत्र चिकित्सा विज्ञान रहा है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के सुदूर गांव ‘कलोटा’ से ताल्लुक रखने वाले डॉ. सिंह ने वर्ष 1978 में मद्रास विश्वविद्यालय (चेन्नई) से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1984 में उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज, जम्मू से एमडी की पढ़ाई पूरी की।
डॉ. जितेंद्र सिंह देश-विदेश में एक प्रतिष्ठित मधुमेह (डायबिटीज) और एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया।
लेखक और शोधकर्ता के रूप में योगदान
चिकित्सा सेवा के साथ-साथ डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य जागरूकता और मधुमेह प्रबंधन पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं। उनकी चर्चित पुस्तक ‘डायबिटीज मेड ईजी’ को व्यापक लोकप्रियता मिली, जिसने वर्ष 2002 में दिल्ली में आयोजित पुस्तक मेले में बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए थे।
चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) द्वारा स्वर्ण पदक (Gold Medal) से भी सम्मानित किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह पुरस्कार उन्हें उस समय तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा प्रदान किया गया था, जिन्हें आगे चलकर उन्होंने 2014 के चुनावी दंगल में शिकस्त दी।