Delhi News: मशहूर शेफ़ विकास खन्ना ने भारतीय खाने की परंपरा और सही बर्तनों के इस्तेमाल पर गहरी बात साझा की है। उन्होंने बताया कि लोहे और मिट्टी के पारंपरिक बर्तन न केवल स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।
विकास खन्ना ने कुकवेयर ब्रांड बर्गनर के साथ साझेदारी में एक नई किचन रेंज लॉन्च की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में लोग अपने किचन को नए रूप में ढाल रहे हैं। अब बर्तनों को सीधे चूल्हे से डाइनिंग टेबल तक लाने का चलन बढ़ रहा है।
खराब नॉन-स्टिक बर्तन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक
शेफ़ विकास ने बताया कि लोग अक्सर जले हुए और खराब कोटिंग वाले नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल जारी रखते हैं। सेहत को नुकसान से बचाने के लिए सही कुकवेयर की समझ जरूरी है। हम ऑर्गेनिक खाने पर खर्च करते हैं, पर सुरक्षित बर्तनों पर ध्यान नहीं देते।
पंजाब के आलू पराठे का तवा हो या दक्षिण भारत का डोसा पैन, लोहे के बर्तन हमेशा बेहतरीन परिणाम देते हैं। पारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजनों को पकाने का यह पुराना तरीका बहुत सेहतमंद है। अब वक्त आ गया है कि हम अपनी पुरानी जड़ों की तरफ लौटें।
कास्ट आयरन पैन को सही से सीज़न करने का तरीका
विकास खन्ना के अनुसार कास्ट आयरन पैन का रखरखाव बेहद आसान है। पैन को कभी भी केमिकल या सख्त जाली से न रगड़ें। धोने के बाद इसे सूती कपड़े से सुखाएं और नमक से सीज़निंग करें। सही देखभाल से यह बिल्कुल नॉन-स्टिक पैन जैसा काम करता है।
तेज़ आंच पर खाना पकाने के लिए कास्ट आयरन पैन सबसे बेहतरीन माने जाते हैं। विकास ने बताया कि उनके रेस्टोरेंट के खास मेन्यू की कई डिशेज़ इन्हीं बर्तनों में बनती हैं। लोहे के पैन में मिलने वाला असली स्वाद स्टील या नॉन-स्टिक में नहीं मिल सकता।
जेन-जी की नई सोच और किचन में एआई का दखल
आज की युवा पीढ़ी अपने खान-पान को लेकर अधिक जागरूक हो चुकी है। जेन-जी ने घर के बने सादे भोजन और खिचड़ी को फिर से पसंद करना शुरू किया है। एआई तकनीक के आने से लोग अब जल्दी और आसान तरीकों से हेल्दी खाना बनाना पसंद करते हैं।
एआई और आधुनिक मशीनों के बढ़ते असर पर विकास खन्ना ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खाना बनाना एक ध्यान की तरह है, जो इंसानी जुड़ाव पैदा करता है। कोई भी मशीन मां के हाथ के स्वाद और खाना बनाते वक्त मिलने वाले सुकून की जगह नहीं ले सकती।
मिट्टी के बर्तनों की खासियत और दादी की कड़ाही
विकास खन्ना के मुताबिक भारतीय खाने की असली जान मिट्टी के बर्तनों में बसती है। मिट्टी में पकने वाले भोजन की खुशबू और स्वाद बेहद खास होता है। इसके अलावा कांसा, पीतल और कास्ट आयरन जैसे धातुओं का भी अपनी-अपनी जगह पर अलग महत्व और उपयोग रहा है।
उन्होंने अपनी दादी से जुड़ी यादों को साझा करते हुए बताया कि उनकी ऐतिहासिक कड़ाही अब मणिपाल म्यूज़ियम में रखी है। पीढ़ियों से चले आ रहे ये पुराने बर्तन यादों का हिस्सा हैं। नए लोगों को उन्होंने लोहे के पैन में साधारण ऑमलेट बनाकर शुरुआत करने की सलाह दी।