Delhi News: मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं की सेहत का खास ख्याल रखना पड़ता है। बारिश के इस मौसम में वायरल फीवर, फूड पॉइजनिंग, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। सीके बिड़ला हॉस्पिटल दिल्ली की डॉक्टर कीर्ति खेतान के मुताबिक, इस मौसम में पतियों को अपनी प्रेग्नेंट वाइफ की देखभाल के लिए कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना चाहिए।
गर्भवती महिला के खानपान और पानी का रखें ध्यान
एक्सपर्ट के अनुसार मानसून में शरीर में पानी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। पति यह सुनिश्चित करें कि उनकी पत्नी रोजाना दो से ढाई लीटर साफ या उबला पानी पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ या ताजा जूस भी दे सकते हैं। हरी सब्जियों को पकाने से पहले नमक या सिरके के पानी में थोड़ी देर जरूर भिगोएं।
पतियों को हमेशा फल अच्छी तरह धोकर और काटने के तुरंत बाद ही खाने के लिए देने चाहिए। इस मौसम में बाहर का तला-भुना खाना या स्ट्रीट फूड खिलाने से पूरी तरह बचना चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण वे मौसमी संक्रमणों और बीमारियों की चपेट में बहुत जल्दी आ सकती हैं।
फिसलन से बचाव और मच्छरों की रोकथाम है जरूरी
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर का संतुलन बदल जाता है और बारिश में जमीन पर फिसलन ज्यादा होती है। इसलिए पति अपनी पत्नी को अच्छी पकड़ वाले एंटी-स्किड और आरामदायक जूते-चप्पल ही पहनाएं। अगर बारिश की वजह से बाहर टहलना संभव न हो, तो डॉक्टर की सलाह पर घर के अंदर ही हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और योग करवाएं।
डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए पति घर में मच्छरों की रोकथाम के पुख्ता इंतजाम करें। हालांकि, पेस्ट कंट्रोल के दौरान इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल्स से गर्भवती महिला को दूर रखना बहुत जरूरी है। उमस भरे मौसम में होने वाली बेचैनी और ज्यादा पसीना आने की समस्या को भी नजरअंदाज न करें।