Solan News: डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी को औषधीय पौधों के अनुसंधान और संरक्षण की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने विश्वविद्यालय को उत्तरी क्षेत्र-1 के क्षेत्रीय सह-सुविधा केंद्र के संचालन के लिए चुना है, जिसके तहत यह केंद्र सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समन्वय का कार्य करेगा।
किसानों से बाजार तक मजबूत होगी कड़ी
औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को सीधे किसानों के खेतों और हर्बल उद्योग की जरूरतों से जोड़ने के लिए यह पहल की गई है। इस क्षेत्रीय केंद्र का मुख्य उद्देश्य औषधीय पौधों की खेती से जुड़े किसानों और उद्यमियों को एक साझा मंच पर तकनीकी और बाजार संबंधी सहायता प्रदान करना है। इसके तहत गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री, उपयुक्त कृषि तकनीक, वैज्ञानिक संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण और भंडारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और किसानों, कृषक उत्पादक संगठनों तथा उद्योगों के बीच आपसी संपर्क को भी मजबूत किया जाएगा।
82 लाख से अधिक का अनुदान स्वीकृत
इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के सुचारू संचालन के लिए वित्तीय सहायता भी सुनिश्चित कर दी गई है। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केंद्र की गतिविधियों के लिए 82 लाख 71 हजार 812 रुपए का अनुदान मंजूर किया गया है। यह राशि केंद्रीय नोडल एजेंसी के माध्यम से निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यांकन के बाद हुआ चयन
विश्वविद्यालय का यह चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अभिरुचि अभिव्यक्ति और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद हुआ है। नौणी विश्वविद्यालय ने जनवरी 2026 में 200 लाख रुपए की वित्तीय सहायता का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। नई दिल्ली में आयोजित मूल्यांकन के दौरान विशेषज्ञ समिति के समक्ष विश्वविद्यालय की अनुसंधान उपलब्धियों, प्रयोगशालाओं, आधारभूत सुविधाओं, तकनीकी विशेषज्ञता और औषधीय व सुगंधित पौधों पर किए गए कार्यों का सफल प्रस्तुतीकरण किया गया था। कुलपति के मार्गदर्शन में पूरी हुई इस प्रक्रिया के बाद विश्वविद्यालय को यह अहम दायित्व मिला है।
गौरतलब है कि उत्तरी क्षेत्र-1 का यह केंद्र मूल रूप से अक्टूबर 2017 में जोगिंदर नगर स्थित भारतीय चिकित्सा पद्धति अनुसंधान संस्थान में स्थापित किया गया था। अब इसके संचालन की कमान नौणी विश्वविद्यालय को मिलने से संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार क्षमताओं का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है। इस नई जिम्मेदारी से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान तलाशने के नए द्वार खुलेंगे। हिमाचल प्रदेश के लिहाज से भी यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है।