Shimla News: हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आगामी विधानसभा चुनावों में नए चेहरों को टिकट देने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि जहां पार्टी को लगातार सफलता नहीं मिल रही, वहां बदलाव जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्वर्ण आयोग के गठन की मांग का भी खुला समर्थन किया है।
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आगामी विधानसभा चुनावों में नए और युवा चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की खुलकर पैरवी की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्वर्ण आयोग गठित करने की मांग का भी समर्थन किया है।
रविवार को सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए लोक निर्माण मंत्री ने लिखा कि जिन क्षेत्रों में पार्टी को लगातार सफलता नहीं मिल पा रही है, वहां नए चेहरों को अवसर देना कांग्रेस हाईकमान का एक अत्यंत सराहनीय और व्यावहारिक निर्णय होगा। उन्होंने पंचायती राज चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत प्रधान पदों पर बड़ी संख्या में युवा चेहरों की जीत पार्टी के लिए एक स्पष्ट संकेत है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावी नतीजों से साफ है कि संगठन में नई ऊर्जा मौजूद है। यह युवा पीढ़ी आने वाले समय में विधानसभा में राज्य को मजबूत और सक्षम नेतृत्व प्रदान कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल ने भी हाल ही में मंडी दौरे के दौरान स्पष्ट संदेश दिया था कि पिछले दो या तीन चुनावों में लगातार हारने वाले नेताओं को पार्टी दोबारा टिकट नहीं देगी। साथ ही उन्होंने संगठन में किसी भी नेता को दायित्व सौंपने से पहले उसके कामकाज और प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करने की बात कही थी।
हर वर्ग को मिले अपनी बात रखने का मंच: स्वर्ण आयोग की मांग का समर्थन
शिमला ग्रामीण में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में स्वर्ण आयोग के गठन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाज के हर वर्ग को अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाने और अपनी आवाज उठाने का अधिकार व मंच मिलना चाहिए।
लोक निर्माण मंत्री ने तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, किसानों, बागवानों और समाज के अन्य विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए अलग-अलग आयोग, बोर्ड और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग को भी अपनी जायज मांगें और मुद्दे शासन के समक्ष रखने के लिए एक उचित मंच मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ऐसा आयोग या बोर्ड स्थापित करने का है, जहां संबंधित वर्ग विधिवत अपनी बात रख सके और जिसके बाद सरकार नियमानुसार उचित निर्णय ले सके।