Kangra News: हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की भारी बारिश लगातार तबाही मचा रही है। राज्य में भूस्खलन, बाढ़ और दुर्घटनाओं के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। अब तक मॉनसून सीजन में 142 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करोड़ों रुपये का संपत्ति नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने आगे भी अलर्ट जारी किया है।
कांगड़ा जिले के फतेहपुर स्थित सुनहारा पंचायत में देर रात बारिश से एक कच्चा मकान गिर गया। इस हादसे में 80 वर्षीय दादी और उनकी पोती गंभीर रूप से घायल हो गईं। वहीं दूसरी ओर, निगुलसरी में लगातार भूस्खलन होने की वजह से किन्नौर में नेशनल हाईवे लगभग 16 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा।
मौसम विभाग ने राज्य में 12 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे भी उरला के पास अचानक लैंडस्लाइड होने से बाधित हो गया। राज्य आपदा संचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से 6 अगस्त के बीच प्राकृतिक आपदाओं में 64 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
उसी समय सीमा के दौरान राज्य में हुई सड़क दुर्घटनाओं में 78 अन्य लोगों की मौत हुई है। इस प्रकार इस मॉनसून सीजन में कुल 142 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा 224 लोग घायल हुए हैं और 3 लोग अब भी लापता हैं। बारिश के कारण 194 पशुओं की भी जान जा चुकी है।
राज्य आपदा संचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 797.87 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा 592.31 करोड़ की क्षति लोक निर्माण विभाग को पहुंची है। इसके अलावा जल शक्ति विभाग को 186.84 करोड़, बिजली विभाग को 5.30 करोड़ और स्वास्थ्य विभाग को 2.14 करोड़ का नुकसान हुआ।
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 2 मकान पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 568 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। राज्य भर में 194 गौशालाएं, 90 दुकानें और कई निजी संपत्तियां प्रभावित हुई हैं। लगातार हो रही इस बारिश से राज्य के कृषि और बागवानी क्षेत्र को भी लाखों का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
प्राकृतिक आपदाओं के कारण सबसे अधिक 14 मौतें लाहौल-स्पीति जिले में दर्ज की गईं। इसके बाद कांगड़ा में 11, कुल्लू में 8, शिमला में 8, मंडी में 7 और चंबा में 7 लोगों की जान गई। अधिकतर हादसे पेड़ और चट्टान गिरने, भूस्खलन, डूबने, करंट लगने, सांप के काटने और आग लगने से हुए हैं।