वैध साक्ष्यों के बिना शादी को नहीं मिलेगी कानूनी मान्यता, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने विवाह की कानूनी मान्यता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना कानूनी सबूत या मान्य रस्मों के किसी रिश्ते को वैध शादी नहीं माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पूर्ण न्याय के नाम पर साक्ष्य अधिनियम के नियमों को नजरअंदाज करना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की अदालत ने देशराज बनाम रोशन लाल मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट ने निचली अपीलीय अदालत का फैसला रद्द कर ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बहाल कर दिया।

यह पूरा विवाद ऊना जिले के निवासी गरीबू की संपत्ति के हक से जुड़ा था, जिनकी मई 1980 में मौत हो गई थी। गरीबू के निधन के बाद भागो नाम की महिला ने खुद को उनकी पत्नी और एकमात्र वारिस बताकर दावा ठोका था। वहीं गरीबू के परिजनों का कहना था कि महिला की शादी किसी अन्य व्यक्ति से हुई थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि महिला गरीबू के साथ अपनी कानूनी शादी को साबित नहीं कर सकी। रिकॉर्ड में विवाह की पुष्टि करने वाला कोई भी विश्वसनीय प्रमाण मौजूद नहीं था। कथित विवाह में न पंडित की मौजूदगी का प्रमाण था और न ही पारंपरिक हिंदू विवाह की आवश्यक रस्मों का पालन हुआ था।

अदालत ने ‘चद्दर अंदाजी’ की परंपरा के दावे को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला ऐसा कोई सबूत नहीं दे सकी, जिससे यह साबित हो कि संबंधित क्षेत्र में यह कानूनन मान्य परंपरा है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त रस्मों का पालन अनिवार्य है।

अदालत ने साफ किया कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए भी साक्ष्य अधिनियम के तय नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यायाधीश अपनी मर्जी से किसी गैर-कानूनी सामग्री को सबूत नहीं मान सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत का फैसला रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट का निर्णय बरकरार रखा।

Right News Desk
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लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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