Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शनिवार को महिला कर्मचारियों के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने से जुड़े कानूनों और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी देना था। हाईकोर्ट रजिस्ट्री की महिला कर्मचारियों ने इसमें हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम हाईकोर्ट की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी की ओर से आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ वकील सुनीता शर्मा ने एक्सपर्ट के रूप में 2013 के यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून की जानकारी दी। उन्होंने 1997 के विशाखा गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों पर भी रोशनी डाली।
विशाखा केस से आसान हुआ कानून बनने का रास्ता
सुनीता शर्मा ने बताया कि विशाखा बनाम राजस्थान सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले के बाद ही इस कानून का रास्ता साफ हुआ। इस कानून के लागू होने के बाद कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को कानूनी मजबूती मिली, जिससे बेहतर माहौल बन सका है।
सामाजिक कार्यकर्ता और एक्सपर्ट सुमित्रा चंदेल ने कहा कि इस कानून का मकसद महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना है। इसके साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए असरदार सिस्टम बनाना है। उन्होंने यौन उत्पीड़न की परिभाषा, इसके दायरे और इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी समझाई।
शी-बॉक्स पोर्टल से घर बैठे दर्ज कराएं शिकायत
कार्यक्रम में शी-बॉक्स पोर्टल के नोडल अधिकारी ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने बताया कि शी-बॉक्स एक ऑनलाइन शिकायत मैनेजमेंट पोर्टल है। इसके जरिए महिला कर्मचारी कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकती हैं। उन्होंने पोर्टल इस्तेमाल करने का तरीका भी विस्तार से समझाया।
हाईकोर्ट प्रशासन के मुताबिक, इस आयोजन का मुख्य मकसद महिला कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। इस जानकारी से वे जरूरत पड़ने पर शिकायत निवारण तंत्र का सही इस्तेमाल कर सकेंगी और अपने कार्यस्थल पर पूरी तरह सुरक्षित महसूस करेंगी।