Shimla News: हिमाचल प्रदेश की 3,758 ग्राम पंचायतों में तैनात 1,023 ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) के नियमितीकरण और पंचायत सचिव पद पर समायोजन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने नियमों का हवाला देकर साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत उनका समायोजन फिलहाल संभव नहीं है।
सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि ग्राम रोजगार सेवक ग्रामीण विकास विभाग के नियमित कर्मचारी नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने विभाग में दिहाड़ीदार के रूप में जरूरी सेवा अवधि भी पूरी नहीं की है। ऐसे में उन्हें सीधे तौर पर नियमित करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि पंचायत सचिवों की सीधी भर्ती और पदोन्नति के नियम बिल्कुल अलग हैं। इन तय नियमों में रोजगार सेवकों के समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से पंचायत सचिव के खाली पड़े पदों पर रोजगार सेवकों को तैनात नहीं किया जा सकता।
सरकार ने 1 जुलाई 2026 से जीआरएस को एक नई व्यवस्था में शामिल कर लिया है। अब वे ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी वीबी-जी राम जी योजना का हिस्सा हैं। जुलाई महीने के बाद से उनके वेतन का भुगतान इसी नई योजना के प्रशासनिक फंड से किया जा रहा है।
इससे पहले फरवरी 2026 से जून 2026 तक इन कर्मचारियों का पांच महीने का वेतन अटका रहा था। मनरेगा के प्रशासनिक मद में केंद्र सरकार से 20.50 करोड़ रुपये का बजट जारी नहीं हुआ था। इस बकाया राशि को हासिल करने के लिए राज्य ने 2 अप्रैल से 3 अगस्त 2026 के बीच केंद्र को 12 बार चिट्ठी भेजी।