Mandi News: हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले जंगलों में अवैध कब्जे के लिए खतरनाक रसायन ग्लाइफोसेट का छिड़काव किया जा रहा है। लोग प्राकृतिक घास नष्ट कर अवैध रूप से मटर उगा रहे हैं। शिकायतें मिलने के बाद वन विभाग ने फसल नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मंडी, कुल्लू, शिमला और सोलन जिलों के जंगलों में अवैध खेती के कई मामले सामने आए हैं। नाचन वन मंडल के थाची क्षेत्र में विभाग ने अवैध फसल उखाड़ी है। इसके बावजूद सराज के बागाचनोगी, शिल्हीबागी, रोड़, चेत और छतरी क्षेत्र में यह अवैध काम बदस्तूर जारी है।
जंगलों में मटर की अगेती फसल से मुनाफा कमाने के लिए यह खतरनाक रसायन छिड़का जाता है। इससे हरी-भरी वनस्पति पूरी तरह सूख जाती है। मिट्टी की पकड़ कमजोर होने से भूस्खलन और कटाव का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा नजदीकी जल स्रोत प्रदूषित होकर सेहत बिगाड़ रहे हैं।
रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी डॉ. अशोक सोमल ने प्रधान अरण्यपाल डॉ. संजय सूद को पत्र भेजा है। उन्होंने पहाड़ों को नुकसान से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि जड़ें नष्ट होने से ढलानों की स्थिरता खत्म हो रही है।
हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्लाइफोसेट पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य वन और जैव विविधता कानूनों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने केरल की तर्ज पर राउंडअप, ग्लाइसेल समेत सभी उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की।
गुमान सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी, पानी और वनस्पति की वैज्ञानिक जांच करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जंगल प्रदेश की जल सुरक्षा और आजीविका की रीढ़ हैं। वन भूमि पर रासायनिक अतिक्रमण को केवल कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय संकट माना जाए।
नाचन के डीएफओ एसएस कश्यप ने बताया कि विभाग इस मामले में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है। टीमें बनाकर दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द एफआईआर दर्ज होगी। उन्होंने बताया कि अब तक पांच छोटे पैच में अवैध फसल नष्ट की जा चुकी है।