Shimla News: मानसून के मौसम में स्क्रब टाइफस, डेंगू और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में अब तक 500 से अधिक सैंपलों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 100 से ज्यादा मरीज स्क्रब टाइफस पॉजिटिव पाए गए हैं। इस बीमारी के कारण एक मरीज की मौत हो चुकी है।
अस्पताल प्रबंधन ने स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों को देखते हुए आम जनता से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। खासकर ग्रामीण और जंगल वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि वहां संक्रमित चिगर माइट (लार्वा माइट) के संपर्क में आने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
यह बीमारी ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से फैलती है। खेतों, घास और झाड़ियों में काम करने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकावट और त्वचा पर चकत्ते इसके प्रमुख लक्षण हैं। लक्षण दिखने पर इसे साधारण वायरल फीवर न समझें और तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएं।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि घास वाले इलाकों में जाते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। पूरी बांह के कपड़े पहनें और कीटनाशक स्प्रे का उपयोग करें। घर लौटने पर स्नान करें और शरीर की जांच करें। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें।
आईजीएमसी अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में स्क्रब टाइफस के मामलों में काफी सुधार देखा गया है। वर्ष 2025 में 539 लोगों की जांच में 141 मरीज पॉजिटिव मिले थे। वहीं 2024 में 622 सैंपलों में केवल 60 लोग संक्रमित पाए गए थे और तीन मरीजों की मौत हुई थी।
साल 2023 की तुलना में अब इस गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। वर्ष 2023 में स्क्रब टाइफस के कारण 13 लोगों की जान चली गई थी। समय पर जांच, बेहतर इलाज और बढ़ती जागरूकता के कारण अस्पताल में मौतों की संख्या को सीमित रखने में बड़ी सफलता मिली है।
