Mandi News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारी और विभाग के विवाद में मंडी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग को तीन दिन के भीतर कर्मी का बकाया वेतन चुकाने का आदेश दिया है। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो विभाग के ऐतिहासिक सर्किट हाउस की कुर्की की जाएगी।
सीनियर सिविल जज असलम बेग की अदालत ने वीरेंद्र कुमार के पक्ष में यह कड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि विभाग 17 अक्तूबर तक ब्याज सहित पूरी राशि अदा करे। समय पर भुगतान न होने की सूरत में मंडी के टारना रोड स्थित सर्किट हाउस का कब्जा अदालत अपने हाथ में ले लेगी।
प्रशासन को कुर्की की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने मंडी के एसपी को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने को कहा है। इसके अलावा संबंधित अमले को 27 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे चेक-आउट प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्रवाई शुरू करने का निर्देश मिला है।
जानिए क्या है कर्मचारी के वेतन विवाद का पूरा मामला
यह पूरा विवाद लोक निर्माण विभाग के कर्मी वीरेंद्र कुमार के वेतन और हर्जाने से जुड़ा है। वीरेंद्र ने विभागीय आदेशों के खिलाफ लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेबर कोर्ट ने 7 सितंबर 2022 को फैसला सुनाते हुए कर्मी को 34 माह का वेतन और 3,29,222 रुपये हर्जाना ब्याज सहित देने को कहा था।
विभागीय स्तर पर आदेश का पालन न होने पर वीरेंद्र ने अधिवक्ता बीसी शर्मा के जरिए याचिका दायर की। इसके बाद सीनियर सिविल जज की अदालत ने 12 अगस्त को विभाग की आपत्तियां खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि विभाग लंबे समय से आदेश की अनदेखी कर रहा है, इसलिए अब कुर्की के सिवा कोई विकल्प नहीं है।
सहायक लोक अभियोजक के विशेष आग्रह पर अदालत ने विभाग को भुगतान के लिए तीन दिनों की अंतिम मोहलत दी है। यदि कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग ने अब भी रकम जमा नहीं की, तो तय शेड्यूल के तहत सर्किट हाउस की कुर्की अमल में लाई जाएगी। इससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
