Mandi News: कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले लाखों पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने नेरचौक-पंडोह खंड में भूस्खलन और जाम की समस्या खत्म करने के लिए 2,340 करोड़ रुपये की नई परियोजना तैयार की है।
इस परियोजना के तहत चार मील, सात मील और पंडोह में अत्याधुनिक सुरंगों तथा ऑल वेदर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करके केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेज दी है।
नेरचौक से पंडोह के बीच ब्यास नदी के साथ लगता पहाड़ी क्षेत्र काफी संवेदनशील और भूस्खलन-संभावित है। मानसून के दौरान बारिश और बादल फटने से यह रास्ता अक्सर बंद हो जाता था। एनएचएआई ने खतरनाक पहाड़ियों को काटने के बजाय सुरंग बनाने का सुरक्षित विकल्प चुना है।
परियोजना के तहत चार मील क्षेत्र में 898 मीटर और 1,032 मीटर लंबी जुड़वां सुरंगें बनाई जाएंगी। इस पूरे निर्माण कार्य पर 390 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 7.892 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
सात मील वाले 2.485 किलोमीटर लंबे हिस्से में लगभग दो किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इस काम पर 690 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 14.235 हेक्टेयर वन भूमि की मंजूरी वन विभाग से पहले ही मिल चुकी है।
पंडोह शहर को ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए 3.641 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड बाईपास बनेगा। इसमें ब्यास नदी पर चार लेन का पुल और 900 तथा 916 मीटर की दो सुरंगें शामिल हैं। इस बाईपास पर कुल 1,260 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस पूरे प्रोजेक्ट में गाड़ियों की डिजाइन स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इस नए ऑल वेदर कॉरिडोर से मानसून में सफर आसान होगा। साथ ही कुल्लू-मनाली के पर्यटन और क्षेत्र के सेब व्यापार को काफी फायदा पहुंचेगा।
एनएचएआई मंडी के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया, “पंडोह बाईपास, चार और सात मील में बनने वाली सुरंगों की डीपीआर तैयार कर मंत्रालय को सौंप दी गई है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।”