Mandi News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिला मंडी ने हिमाचल प्रदेश सरकार की शिक्षा नीतियों और फीस वृद्धि के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। परिषद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रही है। एबीवीपी ने छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल करने की मांग की है।
विभाग संयोजक मंजुल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को कमाई का साधन बना चुकी है। शिक्षण संस्थानों को शिक्षा का केंद्र बनाने के बजाय आर्थिक वसूली का माध्यम बना दिया गया है। विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों और परीक्षा शुल्कों में लगातार भारी बढ़ोतरी करके विद्यार्थियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
विश्वविद्यालयों में भारी फीस वृद्धि पर जताया विरोध
मंजुल शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में परीक्षा व विभिन्न शुल्कों में 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 50 से 60 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई गई है। महंगाई के दौर में यह फैसला पूरी तरह अन्यायी है।
एबीवीपी जिला संयोजक करण ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालयों की वित्तीय अव्यवस्था का बोझ छात्रों पर डाला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अपने छात्र विरोधी फैसले तुरंत वापस ले। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो एबीवीपी पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन चलाकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
आंदोलन का पूरा शेड्यूल और प्रमुख मांगें
एबीवीपी की मुख्य मांगों में छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल करना और बढ़ाई गई फीस वापस लेना शामिल है। इसके तहत 31 जुलाई को इकाई स्तर पर ज्ञापन दिए जाएंगे। फिर तीन अगस्त को उपायुक्त व उपमंडलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजे जाएंगे। पांच अगस्त को इकाई स्तर पर धरना-प्रदर्शन होगा।
इसके बाद 6-7 अगस्त को हस्ताक्षर अभियान और 11 अगस्त को इकाई स्तर पर विरोध रैलियां निकाली जाएंगी। वहीं 13-14 अगस्त को छात्र सांकेतिक भूख हड़ताल करेंगे। इसके बाद 17 अगस्त को जिला केंद्रों पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। परिषद ने सरकार को उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।