Kullu News: हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार आस्था का विराट स्वरूप देखने को मिलेगा। इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से 347 देवी-देवताओं को आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया है।
यह अंतरराष्ट्रीय उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। बाह्य सराज के आनी और निरमंड जैसे दुर्गम इलाकों से कई देवी-देवता 150 से 200 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय कर ढालपुर पहुंचेंगे।
इस बार पिछले साल के मुकाबले 15 अधिक यानी कुल 347 देवी-देवताओं को न्योता मिला है। इनमें से करीब 25 से 30 प्रतिशत देवता ऐसे हैं जिन्हें 100 किलोमीटर से अधिक की लंबी यात्रा तय करनी पड़ती है। 20 अक्टूबर से ही देवी-देवताओं के कुल्लू पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में अस्थायी शिविर सजेंगे, जहां देवलू और कारकून अपने आराध्यों के साथ रहेंगे। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में सुबह-शाम पूजा-अर्चना और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के साथ देव समाज की जीवंत संस्कृति के दर्शन होंगे। यह परंपरा वर्ष 1660 से लगातार चली आ रही है।
धार्मिक महत्व के साथ यह आयोजन व्यापार का भी बड़ा केंद्र बनता है। इस बार मेले में 2,500 से अधिक दुकानें सजने और करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। देश-विदेश के पर्यटकों के लिए यह मेला हिमाचल की संस्कृति को करीब से जानने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है।
