सराज में बिना मंजूरी बनीं 55 सड़कों और 16 हेलिपैड पर हाईकोर्ट की रोक, वन नियमों के उल्लंघन पर कड़ा संज्ञान

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Mandi News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले के नाचन वन मंडल के सराज क्षेत्र में वन संरक्षण नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने बिना अनुमति बनी 55 सड़कों और 16 हेलिपैड के शेष निर्माण कार्य और टारिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को तय की है। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य कोर्ट में पेश किए। रिकॉर्ड के मुताबिक सराज क्षेत्र की 110 सड़कों में से 55 सड़कें जरूरी वन मंजूरी हासिल किए बिना ही पहले बना दी गईं।

अधूरी सड़कें और वन भूमि पर बने अवैध विश्राम गृह

रिकॉर्ड के अनुसार कुछ सड़कों को बनने के बाद मंजूरी मिली, जबकि कई कार्य अभी अधूरे हैं। 10 किलोमीटर लंबी बागासैड-राहीधार-कथ्याली-धारवार-धनसाल सड़क का काम अब भी चल रहा है। इसके अलावा वन भूमि पर 16 हेलिपैड और 20 से अधिक विश्राम गृह बने हैं, जिनमें 12 वन विभाग और 5 लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस शामिल हैं।

अदालत को बताया गया कि इन निर्माणों में पर्यावरणीय और वन संरक्षण कानूनों की खुलेआम अनदेखी की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट ने अगस्त महीने में चंद्रताल, शिकारी देवी और चूड़धार जैसे पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में बिना वैधानिक मंजूरी के चल रहे सड़क निर्माण कार्यों पर सख्त रोक लगा दी थी।

शिकारी देवी अभयारण्य का दायरा सिमटने पर गंभीर सवाल

सुनवाई में शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य का दायरा घटने पर भी चिंता जताई गई। करसोग वन मंडल के अनुसार अभयारण्य का अधिसूचित क्षेत्र 213.51 वर्ग किलोमीटर था, जो जमीन पर 112.94 वर्ग किलोमीटर ही मिला। इसके बाद युक्तिकरण प्रक्रिया के तहत 83 वर्ग किलोमीटर हटाने से इसका दायरा घटकर महज 29.94 वर्ग किलोमीटर रह गया।

कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि वन अधिकार कानून 2006 के नियमों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर सड़कें बनाने की अनुमतियां बांटी गईं। ये स्वीकृतियां न तो स्थानीय वन निवासियों के कल्याण के लिए थीं और न ही वन संरक्षण के नियमों के अनुकूल थीं। अब अदालत ने सभी अवैध निर्माणों पर रोक लगा दी है।

Desh Raj
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