Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ‘हिमकेयर’ (मुख्यमंत्री हिमाचल स्वास्थ्य देखभाल योजना) को नए स्वरूप में लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है। योजना के तहत अब प्रति परिवार सालाना स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे राज्य के करीब 10 लाख लाभार्थी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत कुल 10 लाख रुपये के कवर में 5 लाख रुपये का बेसिक कवर और 5 लाख रुपये का टॉप-अप कवर शामिल होगा। फर्जी अस्पतालों और फर्जी बिलिंग पर रोक लगाने के लिए बीमा कंपनियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है।
यह अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम मरीजों को बिना वजह अस्पताल में भर्ती रखने, फर्जी क्लेम, डुप्लीकेट ट्रांजैक्शन और अनावश्यक टेस्ट या सर्जरी जैसे पैटर्न की तुरंत पहचान करेगा। रियल-टाइम अलर्ट मिलने से सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान और धोखाधड़ी वाले दावों पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी।
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी ने इस योजना के लिए नया इंश्योरेंस टेंडर फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके लिए 12 अक्टूबर तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। प्री-बिडिंग बैठक में 10 स्वास्थ्य बीमा कंपनियों ने रुचि दिखाई है। सबसे कम प्रीमियम (एल-1) की बोली लगाने वाली कंपनी को 3 साल का अनुबंध मिलेगा।
योजना के तहत एम्पेनल्ड सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती रहेगी। इसके अलावा राज्य के बाहर स्थित एम्पेनल्ड अस्पतालों में भी भर्ती होने से पहले और बाद के तय खर्चों का लाभ जारी रहेगा। इससे राज्य के बाहर इलाज कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
हिमकेयर योजना में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले इसमें प्रति परिवार 5 लाख रुपये का सालाना कवर मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। पहले 8 लाख कार्ड में से 3.32 लाख एक्टिव थे, जबकि अब 10 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
बीमा कंपनी का अनुबंध पहले 1 साल का होता था, जिसे अब बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए अब एआई और मशीन लर्निंग से निगरानी होगी। पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तरह ही हर साल मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर महीने में आयोजित की जाएगी।
पहले सामान्य श्रेणी के लिए सालाना 1000 रुपये का प्रीमियम तय था, जबकि कुछ श्रेणियों में यह निशुल्क या 365 रुपये था। नई व्यवस्था के तहत प्रीमियम की दरें टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय की जाएंगी। इससे आम जनता को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।