Shimla News: हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वित्तीय स्वायत्तता समाप्त किए जाने और पदोन्नति में देरी के खिलाफ शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों का आक्रोश गहरा गया है। वीरवार को शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी एक आम सभा में जुटे, जहां सरकार के फैसलों के खिलाफ रोष जताते हुए आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। शिक्षक अपनी मांगों को लेकर पिछले 60 दिनों से धरने पर बैठे हैं।
नए कानून से विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्वायत्तता खत्म
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष नितिन व्यास ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त किए जाने से उच्च शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि गत 20 सितंबर को विधानसभा में लाए गए नए कानून के तहत प्रदेश के पांच राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्वायत्तता को समाप्त कर दिया गया है।
उन्होंने गहराते आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए बताया कि विश्वविद्यालयों को इस वर्ष केवल 142 करोड़ रुपये का सरकारी फंड मिल रहा है, जबकि केवल कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन पर लगभग 252 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके चलते कृषि विश्वविद्यालय और नौणी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में शिक्षकों को कई-कई महीनों तक वेतन न मिलने जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ रही है। इसके साथ ही शिक्षकों को महंगाई भत्ते (DA), वर्ष 2016 के एरियर और करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत नियमित पदोन्नतियां भी नहीं मिल पा रही हैं।
पदोन्नति रुकने से शोध कार्य और शैक्षणिक व्यवस्था पर असर
पालमपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव डॉ. रविन्द्र सिंह ने शिक्षकों की पदोन्नति में हो रही लगातार देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2022 में जारी एक सरकारी पत्र के बाद से करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत होने वाली पदोन्नतियां पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
इसके परिणामस्वरूप कई योग्य शिक्षक पात्रता पूरी होने के बावजूद एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर प्रमोट नहीं हो पा रहे हैं, और कई असिस्टेंट प्रोफेसर पद से ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रशासनिक देरी से शिक्षकों को जहां आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पीएचडी विद्यार्थियों के शोध कार्यों और विश्वविद्यालयों की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। शिक्षक संघों ने सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और पदोन्नति से जुड़े इन तमाम मुद्दों का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।