Shimla News: हिमाचल प्रदेश के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। यहां के 12 प्राइमरी स्कूल पिछले एक साल से बिना शिक्षक चल रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावक चंदा जुटाकर निजी अध्यापकों को अपनी जेब से मानदेय दे रहे हैं।
भाजपा विधायक रीना कश्यप ने विधानसभा के शून्यकाल में यह गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि नारग ब्लॉक में छह, सराहां में पांच और राजगढ़ में एक स्कूल पूरी तरह खाली है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए तुरंत प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक शिक्षक भेजा जाए।
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार की शिक्षकों की कमी
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने माना कि शिमला, सिरमौर और चंबा जैसे दुर्गम इलाकों में शिक्षकों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रिक्त स्कूलों में स्टाफ की तैनाती सरकार की पहली प्राथमिकता है। राज्य के 393 प्राइमरी और तीन माध्यमिक स्कूलों में प्रतिनियुक्ति के जरिए शिक्षक भेजे गए हैं।
प्रदेश भर में लगभग 3,500 ऐसे स्कूल हैं, जो महज एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इनमें 2,500 विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्रों की कुल संख्या 15 से कम है। वर्तमान सरकार अब तक 9,000 शिक्षकों की नियुक्ति और प्रमोशन कर चुकी है। स्कूलों में व्यवस्था सुधारने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि टीजीटी और जेबीटी कैडर के 600 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। विभिन्न श्रेणियों के 6,500 अतिरिक्त पद भी जल्द भरे जाएंगे। राज्य के 364 स्कूलों में प्रिंसिपल्स के पद खाली हैं। सरकार अपने कार्यकाल में 15 से 16 हजार शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य पूरा करेगी।
सरकार लाएगी व्यापक शिक्षा सुधार नीति
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन को आश्वस्त किया कि खाली और सिंगल टीचर वाले स्कूलों की समस्या हल करने के लिए जल्द एक व्यापक नीति लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके।