Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर पूरी तरह तबाह हो गए। वहीं जवाली उपमंडल की नियांगल पंचायत में जमोला पहाड़ी खिसकने से 15 मकानों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड से फसलों व घरों को नुकसान
जमोला पहाड़ी से आ रहे मलबे के कारण मियोली गांव में दहशत का माहौल है। मलबे की चपेट में आने से सागर सिंह की गौशाला और प्यारू राम का स्लेटपोश मकान क्षतिग्रस्त हो गया। बाढ़ के पानी और कीचड़ ने 15 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि में खड़ी मक्की और धान की फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
पहाड़ी से आए फ्लैश फ्लड और मलबे के कारण छह घर बिल्कुल गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। वहीं नौ अन्य मकानों पर भी सीधा खतरा बना हुआ है। प्रभावित परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की शरण लेनी पड़ी। स्थानीय प्रशासन ने जेसीबी मशीन लगाकर नाले को गहरा कर अस्थायी राहत दी है।
वर्ष 2023 से जारी भूस्खलन पर स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों और वार्ड सदस्य मदन लाल का कहना है कि वर्ष 2023 से जमोला घाटी में पहाड़ी लगातार दरक रही है। स्थानीय लोगों ने कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, डीसी कांगड़ा और एसडीएम जवाली से पहाड़ी का वैज्ञानिक उपचार कराने की मांग की है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल कुछ देर जेसीबी चलाकर खानापूर्ति करता है।
पंचायत प्रधान शीला देवी और उपप्रधान डॉ. कुलदीप सिंह ने डीसी कांगड़ा से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की मांग की है। वहीं एसडीएम जवाली नरेंद्र जरियाल ने बताया कि 24 घंटे स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को शिफ्ट कर स्थायी पुनर्वास का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।